डिजिटल/जमशेदपुर: जमशेदपुर के शिक्षा जगत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। टाटा लीज एरिया के निजी स्कूलों ने बकाया फीस प्रतिपूर्ति न मिलने पर कड़ा रुख अपनाया है। स्कूल प्रबंधनों ने घोषणा की है कि अगर सरकार ने बकाया राशि का भुगतान नहीं किया, तो वे आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बीपीएल श्रेणी के बच्चों का नामांकन नहीं लेंगे। इसके साथ ही, स्कूलों ने फीस में 20% तक की भारी वृद्धि का भी संकेत दिया है।
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को दी गई चेतावनी
इस मामले को लेकर अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक पूर्वी सिंहभूम को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। आवेदन में बताया गया है कि निजी स्कूल प्रबंधन बकाया राशि के नाम पर गरीब बच्चों के हक और नियमों के साथ समझौता कर रहे हैं।
नियमों के उल्लंघन का आरोप: क्या कहता है कानून?
शिकायत पत्र में मुख्य रूप से दो कानूनी बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया गया है:
- RTE नियमावली 2011 का उल्लंघन: आरटीई नियमावली 2011 के भाग 9 (कंडिका-1) के अनुसार, जिन स्कूलों को सरकार या किसी संस्था (जैसे टाटा स्टील) द्वारा लीज, सब-लीज या रियायती दर पर जमीन मिली है, उन्हें ‘सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों’ की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे में नामांकन से मना करना आरटीई अधिनियम की सीधी अवमानना है।
- झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017: इस कानून की धारा 7A (1)(E) के मुताबिक, फीस समिति द्वारा निर्धारित शुल्क दो वर्षों के लिए प्रभावी होता है। चूंकि अधिकतर स्कूलों ने सत्र 2025-26 में पहले ही फीस बढ़ा दी है, इसलिए 2026-27 में दोबारा वृद्धि करना इस कानून का उल्लंघन होगा।
अभिभावकों में चिंता का माहौल
स्कूलों के इस रुख से उन परिवारों में हड़कंप मच गया है जो शिक्षा के अधिकार के तहत अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अगर स्कूल 20% फीस बढ़ाते हैं, तो इसका सीधा असर आम मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर पड़ेगा।
प्रशासन से मांग
आवेदन के माध्यम से मांग की गई है कि जिला प्रशासन इन स्कूलों के प्रबंधनों के साथ वार्ता करे और सुनिश्चित करे कि कानून का उल्लंघन न हो। अगर स्कूल प्रबंधन अपनी मनमानी पर अड़े रहते हैं, तो उन पर उचित वैधानिक कार्रवाई की जाए ताकि बीपीएल वर्ग के बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो।

