Bihar: कांग्रेस के बाद आरजेडी में भी बगावत की “बू”, भाई वीरेंद्र ने अपनी ही पार्टी पर उठाया सवाल, जानें क्या कहा?

Neelam
By Neelam
3 Min Read

बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है। कांग्रेस के बाद राष्ट्रीय जनता दल(आरजेडी) में “असंतोष की आवाज” उठने लगी है। मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र ने अपनी पार्टी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 

पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर नाराजगी

पार्टी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने टिकट वितरण को लेकर अपनी ही पार्टी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका एक वीडियो सामने आया है, जो पटना का बताया जा रहा है, जिसमें वे खुलकर पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर नाराजगी जताते नजर आ रहे हैं।

स्थानीय और मजबूत नेताओं को नजरअंदाज करने का आरोप

भाई वीरेंद्र का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने पार्टी के टिकट वितरण पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय और मजबूत नेताओं को नजरअंदाज कर दूसरे जिलों से आए लोगों को उम्मीदवार बनाया गया। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के फैसलों से पार्टी को नुकसान हुआ और विधानसभा में अपेक्षित प्रभाव नहीं बन पाया।

वायरल वीडियो में क्या?

वायरल वीडियो में भाई वीरेंद्र ने कहते नजर आ रहे हैं कि, “नहीं बोलना चाहिए विजय मंडल जी एक साथ एमएलए थे जब यादव को ही टिकट देना था तो विजय मंडल की टिकट क्यों काटी गई, क्या खामी थी विजय मंडल में…हम इनकी लड़ाई बहुत लड़े हैं अपने दल में, नहीं कटना चाहिए था, वो भी बाहर के लोगों को टिकट दिया गया जो बाहर के थे, दूसरे जिला के लोग थे। कुछ ऐसे नेता हमारे यहां है जो नाम के समाजवादी हैं और तीन जिला चलाते हैं, कुछ नेता है जो कैमूर, रोहतास और बक्सर भी जोतते हैं, भोजपुर तो हम छोड़ा दिए। इसलिए वैसे लोग जब तक राजनीति में रहेंगे और उनके कहने पर टिकट मिलेगा तो वहीं हश्र होगा जो आज हमारे पार्टी का हुआ है”। 

कौन हैं विजय मंडल जिनका हुआ जिक्र?

भाई वीरेंद्र के इस वीडियो के सामने आने के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या आरजेडी में सब कुछ ठीक नहीं है। बता दें कि दिनारा विधानसभा सीट से विजय मंडल 2020 में आरजेडी के टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए थे, उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह को 8228 वोटों से हराया था। हालांकि 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काटकर शशि शंकर कुमार उर्फ राजेश यादव को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

Share This Article