Bihar: भारत-ईयू व्यापार समझौते पर आज लगेगी मुहर, ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से कितना होगा फायदा?

Neelam
By Neelam
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देश के 77वें गणतंत्र दिवस पर भारत ने यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय आयोग (ईसी) के अधिकारियों को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया। इस समारोह के ठीक बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन आज 11:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैदराबाद हाउस में मुलाकात करेंगी। इसके बाद दोपहर 1:15 बजे भारत और यूरोपीय संघ की ओर से संयुक्त प्रेस बयान जारी किया जाएगा।

“मदर ऑफ ऑल डील्स”

चार साल में 18 दौर-की बातचीत के बाद भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का रास्ता साफ हो गया है। इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” का नाम दिया गया है। इस समझौते से भारत के टेक्सटाइल्स, लेदर एंड फुटवियर, जेम्स एंड जूलरी, केमिकल्स और समुद्री उत्पादों जैसी चीजों पर यूरोपियन यूनियन में लगने वाले इंपोर्ट ड्यूटी में राहत मिलेगी। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा, डील फाइनल हो गई है।

18 साल से चल रही है बातचीत

भारत-ईयू के बीच इस समझौते की नींव साल 2007 में रखी गई थी। डील की नींव 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में रखी गई थी। जून 2007 में ब्रॉड-बेस्ड बाइलेटरल ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट (BTIA) पर बातचीत शुरू हुई। 2013 तक 15 से अधिक दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन ऑटोमोबाइल, स्पिरिट्स, डेटा सिक्योरिटी, वीजा नियमों और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर गतिरोध को दूर नहीं किया जा सका।

नौ साल के शुरू हुई वार्ता

लगभग नौ साल के अंतराल के बाद, नई राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ आधिकारिक तौर पर वार्ता को फिर से शुरू किया गया। 2022 के बाद से वैश्विक भू-राजनीति में आए बदलावों और चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक कवायद ने दोनों पक्षों को करीब ला दिया है। आज ब्रसेल्स और नई दिल्ली, दोनों ही एक-दूसरे को रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस बार तकनीकी अड़चनों से ज्यादा ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ प्रबल है, जो इस जटिल समझौते को अंजाम तक पहुंचाने के लिए तैयार है।

भारत को ट्रेड डील से क्या होगा फायदा?

भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के 27 देशों के लगभग 45 करोड़ उच्च-आय वाले उपभोक्ताओं तक तरजीही पहुंच मिलेगी। वह भी शून्य टैरिफ या बेहद कम दरों पर। भारत श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इस डील से फायदा होगा। खासकर कपड़ा, फार्मा उद्योग, सेवाओं और पेशेवरों के क्षेत्र में। इस समझौते का सबसे चर्चित और आकर्षक हिस्सा ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ा है। वर्तमान में, भारत यूरोपीय देशों से आने वाली पूरी तरह निर्मित कारों (CBU) पर 70% से लेकर 110% तक का भारी आयात शुल्क वसूलता है। प्रस्तावित समझौते के तहत, 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली लग्जरी कारों पर इस शुल्क को तत्काल प्रभाव से 40% तक लाया जा सकता है। भविष्य में इसे धीरे-धीरे घटाकर महज 10% करने की योजना है।

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