Bihar: “हर हर महादेव” केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का ये कैसा जवाब, UGC पर सवाल को यूं कर गए इग्नोर

Neelam
By Neelam
3 Min Read

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 जारी किए हैं। ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं। हालांकि, इसे लेकर अगड़ी जातियों में काफी आक्रोश फैल गया है। इस यूनिवर्सिटी कैंपस और कॉलजों का माहौज जहरीला करने वाला बताया जा रहा है। इसे लेकर कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी या मंत्री, नेता कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

इस बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पत्रकारों को सवाल पर जिस तरह से चुप्पी साधी, वह चर्चा का विषय बन गया है। पत्रकारों ने इस मसले पर सवाल पूछा तो केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सीधे नियम के बारे में जवाब देने के बजाय ‘हर हर महादेव’ का नारा लगाया।

यूजीसी के सवाल पर नित्यानंद राय दिखे असहज

बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित कौनहारा घाट पर एक धार्मिक आयोजन के दौरान केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय की असहजता साफ तौर पर देखी गई। वे यहां ‘गजग्राह’ की मूर्ति स्थापना कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद जब मीडिया ने उनसे यूजीसी के नए कानून और सवर्णों के विरोध पर प्रतिक्रिया मांगी, तो मंत्री जी ने सवालों का जवाब देने के बजाय ‘हर-हर महादेव’ और ‘भगवान विष्णु’ के जयकारे लगाने शुरू कर दिए।

क्या कहता है नया नियम?

यूजीसी ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं। नियमों के मुताबिक हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी। कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है। कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाना और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना है।

देश भर में समर्थन के साथ विरोध शुरू

इधर, नए नियम को लेकर देश भर में समर्थन के साथ काफी विरोध देखा जा रहा है। कुछ छात्रों, सामाजिक समूहों और संगठनों का कहना है कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ है और इसमे भेदभाव को रोकने के नाम पर उन्हें आरोपियों के रूप में मान लिया गया है। उन्हें चिंता है कि इसके तहत बिना मजबूत सबूत के आरोपों को बढ़ावा मिल सकता है और इससे झूठी शिकायतों और नाइंसाफी का खतरा होगा। कुछ प्रशासनिक अफसरों ने भी विरोध जताया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के एक PCS अधिकारी ने इस नियम को ‘काला कानून’ कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उन्होंने कहा कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को असंवैधानिक तरीके से निशाने पर रखता है।

Share This Article