डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: केंद्र सरकार द्वारा वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोकने के आदेश के बाद औद्योगिक जगत में हलचल तेज हो गई है। देश की दिग्गज स्टील उत्पादक कंपनी टाटा स्टील ने इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे उद्योगों के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है।
सरकार का फैसला और टाटा स्टील का रुख
सीआईआई के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट डीबी सुंदर रामम ने कहा कि कंपनी को आदेश की कॉपी मिल गई है और इसका गहन अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देना सराहनीय है, लेकिन औद्योगिक स्थिरता के लिए कमर्शियल गैस की उपलब्धता भी उतनी ही अनिवार्य है।
मुख्य चिंताएं: उत्पादन और लागत पर संकट
डीबी सुंदर रामम ने बातचीत के दौरान तीन मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया।
सप्लाई चेन पर असर: कमर्शियल एलपीजी की 100% सप्लाई बंद होने से केवल टाटा स्टील ही नहीं, बल्कि पूरी औद्योगिक ईकाई का प्रोडक्शन और सप्लाई नेटवर्क प्रभावित होगा।
युद्ध का दोहरा दबाव: खाड़ी देशों में जारी लंबा युद्ध पहले ही कच्चे माल की कीमतों और लॉजिस्टिक्स को प्रभावित कर रहा है। अब गैस की किल्लत से उत्पादन लागत में और इजाफा होने की आशंका है।
विकल्प की तलाश: कंपनी अब एलपीजी के स्थान पर अन्य वैकल्पिक गैसों के उपयोग पर मंथन कर रही है।
अलर्ट मोड पर टाटा स्टील
वर्तमान वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए टाटा स्टील ने खुद को ‘अलर्ट मोड’ पर रखा है। कंपनी अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रही है, ताकि युद्ध और गैस आपूर्ति के संकट के बीच सप्लाई चेन को टूटने से बचाया जा सके।

