डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: स्टील सिटी के करीब स्थित दलमा वन्यजीव अभयारण्य अब पर्यटन के नक्शे पर एक नई इबारत लिखने को तैयार है। हाल ही में संपन्न हुए तीन दिवसीय बर्ड फेस्टिवल ने यह साबित कर दिया है कि दलमा की गोद में जैव विविधता का अनमोल खजाना छिपा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘दलमा मॉडल’ प्रकृति संरक्षण और पर्यटन के बीच बेहतरीन संतुलन का उदाहरण बन सकता है।
कैमरे में कैद हुए 84 प्रजातियों के परिंदे
इस फेस्टिवल का सबसे बड़ा आकर्षण रहे वो दुर्लभ पक्षी, जिन्हें देखने के लिए पक्षी प्रेमी मीलों दूर जाते हैं। 130 से अधिक विद्यार्थियों ने जंगल की खाक छानी और कुल 84 प्रजातियों को ट्रैक किया।
दिखने वाले कुछ प्रमुख और दुर्लभ पक्षी
जर्डन नाइटजार, बैंडेड बे कुकू, ब्लू-कैप्ड रॉक थ्रश, इंडियन व्हाइट-आई और भूरे गालों वाली फुलवेटा।
क्यों खास है ‘दलमा इको-टूरिज्म मॉडल’?
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ डॉ. आशीष झा और दलमा के रेंजर दिनेश चंद्रा के अनुसार, दलमा में इको-टूरिज्म शुरू होने से कई फायदे होंगे।
स्थानीय रोजगार: गाइड, होम-स्टे और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में स्थानीय युवाओं को सीधे तौर पर काम मिलेगा।
पर्यावरण जागरूकता: जब पर्यटक करीब से प्रकृति को देखेंगे, तो वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी संवेदनशीलता बढ़ेगी।
एडवेंचर एक्टिविटीज: यहां बर्ड वाचिंग के अलावा नेचर ट्रेल और जंगल सफारी की अपार संभावनाएं हैं।
सीखने के साथ सम्मान भी
फेस्टिवल के आखिरी दिन विद्यार्थियों ने न केवल बर्डिंग सीखी, बल्कि अपने अनुभवों को प्रेजेंटेशन के जरिए साझा भी किया। पेंटिंग और क्विज प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं को वन्यजीवों के प्रति जागरूक किया गया और विजेताओं को सम्मानित किया गया।

