‘कभी नरेंद्र मोदी का चेहरा तक देखना नहीं चाहते थे…’, शिवानंद तिवारी को ‘पुराने दिनों’ को क्यों किया याद?

Neelam
By Neelam
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं। नीतीश के दिल्ली का रूख करने को लकर सियासी हलचल अब तक कम नहीं हुई हैं। इसी बीच, बिहार की राजनीति के दिग्गज और अनुभवी समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने एक लंबी फेसबुक पोस्ट लिखी है। जिसमें उन्होंने उन दिनों को याद दिलाया जब नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी का चेहरा तक देखना पसंद नहीं करते थे और भाजपा नेताओं के लिए रखा भोज तक रद्द कर दिया था। 

‘…तो यह नरेंद्र मोदी की नैतिक विजय’

शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि मुझे नहीं मालूम कि राज्यसभा का सदस्य बनने के बाद नीतीश कुमार आगे क्या करने वाले हैं। एक चर्चा यह है कि वे केंद्र सरकार में मंत्री बन सकते हैं। केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होना या न होना उनकी इच्छा पर निर्भर करता है, लेकिन यदि ऐसा होता है तो एक तरह से यह नरेंद्र मोदी की नैतिक विजय मानी जाएगी।

‘पुराने दिनों’ की याद दिलाई

पोस्ट में उन्होंने याद दिलाया कि एक समय नीतीश मोदी का चेहरा तक देखना नहीं चाहते थे। उन्होंने लिखा है- याद कीजिए, ये वही नीतीश कुमार हैं जो कभी नरेंद्र मोदी का चेहरा तक देखना नहीं चाहते थे। नरेंद्र मोदी की वजह से उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के लिए रखा गया भोज तक रद्द कर दिया था। ऐसे में यदि वह आज नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के सदस्य बनते हैं, तो मोदी जी के लिए इससे बड़ा गौरव और क्या हो सकता है!

पूछा- क्या मोदी कैबिनेट में शामिल होना गरिमापूर्ण होगा?

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि नीतीश कुमार के साथ निकटता से काम करने के बाद यह सोचकर पीड़ा होती है। अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में रहने और बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या मोदी कैबिनेट में शामिल होना गरिमापूर्ण होगा।

मोदी के नीचे मंत्री बनना नीतीश की साख पर सवाल

पुराने दिनों को याद करते हुए शिवानंद तिवारी ने लिखा कि नीतीश कुमार ने कभी बिहार के चुनाव प्रचार में नरेंद्र मोदी को कदम नहीं रखने दिया था। तब नीतीश कहा करते थे कि बिहार में एक मोदी (दिवंगत सुशील कुमार मोदी) पहले से मौजूद है, यहां दूसरे मोदी की कोई जरूरत नहीं है। ऐसे में अब उन्हीं मोदी के नीचे मंत्री बनना नीतीश की साख पर सवाल खड़ा करेगा।

पुराने संबंधों को ध्यान में रख कर दे डाली सलाह

शिवानंद तिवारी ने आगे लिखा है, खैर, हम क्या सोचते हैं या क्या नहीं, इससे नीतीश जी को क्या फर्क पड़ता है! लेकिन उनके साथ पुराने संबंधों को ध्यान में रखते हुए मुझे लगता है कि उन्हें नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होना चाहिए। अगर, नरेंद्र मोदी जी सचमुच उन्हें सम्मान देना चाहते हैं, तो एनडीए गठबंधन का राष्ट्रीय संयोजक बनाना उनकी प्रतिष्ठा के अधिक अनुकूल होगा। इससे उनकी गरिमा भी बनी रहेगी और गठबंधन की राजनीति में उनकी भूमिका भी बनी रहेगी। अब देखना यह है कि राज्यसभा जाने के बाद नीतीश जी क्या निर्णय लेते हैं और उनके आसपास के लोग उन्हें कैसी सलाह देते हैं। यदि वे सचमुच नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल की सदस्यता स्वीकार करते हैं, तो मेरे विचार से वह एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन होगा।’

कभी नीतीश के काफी करीब थे शिवानंद

बता दें कि शिवानंद तिवारी एक समय में नीतीश कुमार के बहुत करीब रहे हैं। समता पार्टी की नींव रखने में नीतीश कुमार के साथ शिवानंद तिवारी की भी भूमिका थी और बाद में जदयू में भी साथ काम किया। शिवानंद तिवारी जदयू के महासचिव और प्रवक्ता भी रह चुके हैं, लेकिन बाद में आरजेडी में चले गए और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। अब वह आरजेडी से बागी हैं और तेजस्वी यादव पर भी सवाल उठाते हैं।

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