धार्मिक आस्था का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। साल 2026 में यह पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगा। मान्यता है कि इन नौ दिनों में सच्चे मन से मां दुर्गा की पूजा और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
आज 23 मार्च 2026 को नवरात्रि का पांचवां दिन है, जो मां स्कंदमाता को समर्पित है। देवी स्कंदमाता को ज्ञान, बुद्धि और मातृत्व की प्रतीक माना जाता है। उनकी कृपा से भक्तों को संतान सुख, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
🌼 मां स्कंदमाता का स्वरूप
मां स्कंदमाता सिंह पर विराजमान रहती हैं और उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय (स्कंद देव) होते हैं। उनके चार हाथ हैं—एक में वरमुद्रा, दो में कमल पुष्प और एक से वे स्कंद देव को थामे रहती हैं। उनका यह रूप भक्तों को करुणा और शक्ति का संदेश देता है।
⏰ पूजा का शुभ मुहूर्त
सूर्योदय: सुबह 06:22
ब्रह्म मुहूर्त: 04:47 से 05:35
प्रातः संध्या: 05:11 से 06:22
अभिजीत मुहूर्त: 12:03 से 12:52
सायाह्न संध्या: 06:34 से 07:45
अमृत काल: 06:37 से 08:05
🪔 पूजा विधि
नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद मां स्कंदमाता को पीला चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल, पंचामृत और मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप करें और व्रत कथा पढ़ें। अंत में आरती कर मां से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
🍌 मां को प्रिय भोग
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है। इसके अलावा केसर वाली खीर और पीले रंग की मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं।
📿 मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः॥
🪔 आरती (संक्षेप)
जय तेरी हो स्कंद माता, पाँचवाँ नाम तुम्हारा आता।
सबके मन की जानन हारी, जग जननी सबकी महतारी॥
चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मां स्कंदमाता की आराधना से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा कर मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

