सांसद सुधाकर सिंह के निशाने पर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, नियुक्तियों में गड़बड़ी से लेकर खरीद-फरोख्त तक का आरोप

Neelam
By Neelam
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सांसद सुधाकर सिंह ने भागलपुर स्थित सबौर के कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया, विश्वविद्यालय में नियुक्तियों से लेकर खरीद-फरोख्त तक में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। सांसद सुधाकर सिंह ने कुलपति दुनिया राम सिंह पर नियुक्तियों में गड़बड़ी, अपने परिजन को फायदा पहुंचाने और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

बेटी की नियुक्ति के लिए बदले नियम

सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि कुलपति ने अपनी ही बेटी को फायदा पहुंचाने के लिए नियम तक बदल दिए। सांसद सुधाकर सिंह ने कुलपति दुनिया राम सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बेटी अमिता सिंह को बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर में अवैध रूप से नियुक्त किया गया। उन्होंने कहा कि अमिता सिंह का वेतन 30 हजार रुपए से बढ़ाकर सवा लाख रुपया कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अपनी बेटी को नौकरी दे दी लेकिन वह महीने में मुश्किल से 2-5 दिन ही विश्वविद्यालय आती हैं।उन्होंने कहा कि अगर भरोसा नहीं है तो विश्वविद्यालय का सीसीटीवी की जांच की जा सकती है।

नियम के विरूद्ध नियुक्तियां करने का आरोप

सांसद सुधाकर सिंह ने दावा करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा के कानून के अनुसार, विश्वविद्यालयों को सीधे नियुक्ति का अधिकार नहीं है; यह प्रक्रिया बिहार लोक सेवा आयोग या अधिकृत सरकारी संस्थाओं के माध्यम से होनी चाहिए। इसके बावजूद, कृषि मंत्री और बिहार सरकार द्वारा दो बार रोक लगाए जाने के आदेशों की अवहेलना करते हुए कुलपति धड़ल्ले से नियुक्तियां कर रहे हैं।

अपने चहेतों को लाभ पहुँचाने का आरोप

सांसद सुधाकर सिंह ने साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया कि कृषि विज्ञान केंद्र में सात पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था, लेकिन अपने चहेतों को लाभ पहुँचाने के लिए नियम विरुद्ध तरीके से आठवें व्यक्ति (राम नरेश जी, जो उत्तर प्रदेश के निवासी हैं) को प्रोफेसर के रूप में नियुक्त कर दिया गया। सांसद ने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों से लेकर पढ़ाने वाले स्टाफ तक आधे से ज्यादा लोग उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि बिहार के प्रतिभाशाली युवाओं को दरकिनार किया जा रहा है।

बेटे और रिश्तेदारों को टेंडर के जरिए फायदा

यही नहीं, आरजेडी सांसद ने कुलपति पर अपने बेटे और रिश्तेदारों को भी फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि कुलपति के पुत्र आदर्श कुमार वाराणसी में हत्या के आरोपी हैं, इसके बाद भी उसकी कंपनी को विश्वविद्यालय के आउटसोर्सिंग कार्यों का अवैध ठेका दिया गया है। उन्होंने कहा, एक निजी एजेंसी को विश्वविद्यालय में काम दिलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई, जिसमें उनके करीबी लोग जुड़े हुए हैं। इस एजेंसी पर संविदा कर्मचारियों के वेतन से हर महीने पैसे काटने और करीब 25 लाख रुपये की लेवी वसूलने का भी आरोप है।

सरकारी धन से पेटेंट अपने नाम करने का आरोप

सांसद ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि कुलपति ने अपने 25 साल के करियर में एक भी पेटेंट हासिल नहीं किया था, लेकिन विश्वविद्यालय के पद पर बैठते ही एक साल के भीतर विश्वविद्यालय के 25 लाख रुपये खर्च करके लगभग 20 पेटेंट अपने नाम करवा लिए। इसके अलावा, शिक्षकों के वेतन मद के 15 लाख रुपये अवैध रूप से एक एनजीओ (डॉ. एसपी सिंह) को ट्रांसफर कर दिए गए।

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