डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के चाईबासा की रहने वाली सिल्की कुमारी की कहानी आज हर उस शख्स के लिए मिसाल है जो हालातों के आगे घुटने टेक देते हैं। इंटरमीडिएट कॉमर्स की परीक्षा में 455 अंक लाकर पूरे जिले में द्वितीय स्थान हासिल करने वाली सिल्की के इस मुकाम के पीछे किताबों से ज्यादा उसकी मां के पसीने की खुशबू है।
फलों की दुकान और हौसलों की उड़ान
सिल्की के सिर से पिता (स्व. संतोष सोनकर) का साया उठने के बाद घर की माली हालत डगमगा गई थी। बस स्टैंड चौक पर पिता की फलों की दुकान अब बंद होने की कगार पर थी, लेकिन मां साधना सोनकर ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद तराजू संभाला और फल बेचकर बेटी की पढ़ाई का खर्च निकाला।सिल्की कुमारी बताती है कि एक दौर ऐसा था जब लगा कि सातवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी, लेकिन मां ने बस एक ही बात कही कि पढ़ाई ही तुम्हारी किस्मत बदल सकती है।
ताने सहकर भी नहीं टूटीं मां साधना
सिल्की की मां साधना सोनकर बेटी की कामयाबी पर भावुक हैं। उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद जब उन्होंने दुकान संभाली और बेटी को आगे पढ़ाया, तो समाज के कई लोगों ने ताने भी दिए। लेकिन आज सिल्की की सफलता ने उन सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है। इस संघर्ष में सिल्की के भाई ने भी परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
भविष्य का लक्ष्य: चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA)
सिल्की अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत और मां के त्याग को देती हैं। अपनी तैयारी के बारे में वह बताती हैं कि वह नियमित पढ़ाई करती है। रोजाना 5 घंटे की समर्पित पढ़ाई। सिल्की के अनुसार अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो सोशल मीडिया पढ़ाई के लिए एक बेहतरीन जरिया बन सकता है। सिल्की अब सीए बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करना चाहती हैं। संत जेवियर्स गर्ल्स इंटर कॉलेज की इस छात्रा ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो अभावों की जमीन पर भी सफलता के फूल खिल सकते हैं।

