मिसिर बेसरा के गढ़ में घुसे सुरक्षा बल: पोड़ाहाट के जंगलों में मुठभेड़, कई नक्सलियों के हताहत होने की खबर

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के दुर्गम जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ अपनी घेराबंदी तेज कर दी है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के पोड़ाहाट वन क्षेत्र में मंगलवार तड़के पुलिस और नक्सलियों के बीच एक भीषण मुठभेड़ हुई। सोनुआ थाना क्षेत्र के केड़ाबीर इलाके में हुई इस आमने-सामने की फायरिंग में एक से दो नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है, जबकि कई अन्य के घायल होने की संभावना जताई जा रही है। इलाके में सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।

खुफिया इनपुट पर बड़ा एक्शन
​यह पूरी कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि सुरक्षा बलों की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। नक्सलियों की हलचल को देखते हुए कोबरा 209 बटालियन और जिला पुलिस की एक संयुक्त टीम पिछले दो दिनों से सोनुआ और गोइलकेरा थाना क्षेत्रों के घने जंगलों में सघन तलाशी अभियान चला रही थी।
​मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे, जब जवान जंगल के भीतर बढ़ रहे थे, तभी घात लगाए नक्सलियों से उनका सामना हो गया। जवानों को भारी पड़ता देख नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी मोर्च संभाला।

बैकफुट पर मिसिर बेसरा का संगठन?
​सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यह पूरा इलाका 1 करोड़ के इनामी नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा के प्रभाव वाला माना जाता है। हाल के दिनों में गोइलकेरा क्षेत्र में बढ़ी नक्सली गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा बल लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

कौन है मिसिर बेसरा, जो बना है चुनौती?
​सुरक्षा बलों के निशाने पर मौजूद मिसिर बेसरा का इतिहास बेहद हिंसक रहा है।
छात्र से कमांडर का सफर: मूल रूप से गिरिडीह जिले के पीरटांड का रहने वाला मिसिर बेसरा कभी धनबाद के पीके राय कॉलेज से हिंदी में बीए ऑनर्स कर रहा था। 1980 के दशक की शुरुआत में गांव के दबंगों से हुए एक विवाद के बाद उसने नक्सलवाद की राह चुन ली। संगठन के भीतर उसे भास्कर, सुनील, सुनिर्मल, सागर और विवेक जैसे कई नामों से जाना जाता है।

बालिबा का खूनी कांड (2004): मिसिर बेसरा के नाम पर सबसे बड़ा और हिंसक दाग अप्रैल 2004 में सारंडा के बालिबा में हुआ हमला है, जहां उसके नेतृत्व में घात लगाकर किए गए हमले में 29 से 32 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

पुलिस कस्टडी से फरार: उसे एक बार गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन वह बिहार के लखीसराय में कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा था।

इस मुठभेड़ और सुरक्षा बलों के बढ़ते घेरे ने यह साफ कर दिया है कि अब नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों पर सीधे प्रहार किया जा रहा है। केड़ाबीर के जंगलों को चारों तरफ से सील कर दिया गया है ताकि कोई भी नक्सली बचकर भाग न सके।

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