चुनावी रणनीतिकार और जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को पटना हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने प्रशांत किशोर के खिलाफ दर्ज उस एफआईआर को रद्द कर दिया है, जिसमें उन पर ‘बात बिहार की’ कैंपेन का आइडिया और कंटेंट चोरी करने का संगीन आरोप लगाया गया था।
कोर्ट ने क्या कहा?
पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि किसी राजनीतिक अभियान की अवधारणा, नारा या आइडिया पर कॉपीराइट का दावा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राजनीतिक प्रचार अभियान का आइडिया किसी साहित्यिक, कलात्मक या मौलिक रचना की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उस पर कॉपीराइट का दावा नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा- आपराधिक मामला नहीं बनता
अदालत ने यह भी माना कि FIR में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया आपराधिक मामला नहीं बनाते। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी अभियान के नाम या विचार में समानता है भी, तो उसे सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों को लेकर आपराधिक कार्रवाई उचित नहीं है।
क्या था पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की शुरुआत साल 2020 में हुई थी। जेडीयू के पूर्व मीडिया सलाहाकर रहे शाश्वत गौतम ने प्रशांत किशोर पर ‘बात बिहार की’ कार्यक्रम शुरू किए जाने को लेकर फर्जीवाड़ा और चोरी करने का आरोप लगाया था। शाश्वत गौतम का दावा था कि वह बिहार के विकास को लेकर एक विशेष राजनीतिक कैंपेन और स्लोगन पर काम कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके एक पूर्व सहयोगी के माध्यम से यह पूरा आइडिया और कंटेंट लीक होकर प्रशांत किशोर तक पहुंच गया। इसके बाद प्रशांत किशोर ने कथित तौर पर उसी कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल करते हुए ‘बात बिहार की’ नाम से अपना एक बड़ा अभियान लॉन्च कर दिया।

