NEET पेपर लीक: जमशेदपुर में फूटा कांग्रेस का गुस्सा, DC दफ्तर पर प्रदर्शन कर पीएम और शिक्षा मंत्री का मांगा इस्तीफा

Manju
By Manju
3 Min Read

डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक का मामला अब देशव्यापी आक्रोश के साथ-साथ एक बड़े सियासी संग्राम में तब्दील हो चुका है। लाखों छात्रों और अभिभावकों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में जमशेदपुर जिला कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उपायुक्त कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
​यह विरोध प्रदर्शन जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी का साफ तौर पर आरोप है कि ऐसी घटनाएं देश की शिक्षा व्यवस्था की साख को पूरी तरह से तार-तार कर रही हैं। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की बिना किसी पक्षपात के उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और पर्दे के पीछे छिपे असली दोषियों को बेनकाब कर उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

लाखों छात्रों का भरोसा टूटा–परविंदर सिंह
​प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि नीट जैसी देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक में पेपर लीक होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस घटना ने रात-दिन मेहनत करने वाले लाखों होनहार छात्रों और उम्मीद लगाए बैठे उनके अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है। सरकार को इस भारी लापरवाही की पूरी जवाबदेही लेनी होगी। उन्होंने इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए देश के प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। साथ ही पेपर लीक के सदमे के कारण आत्महत्या करने वाले मासूम छात्रों की मौत के लिए भी सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
​प्रदर्शन के समापन के बाद कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त से मुलाकात की और उनके माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है ताकि पूरे मामले की एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित हो सके। देश के लाखों पीड़ित और प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा की जा सके। भविष्य में ऐसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की शुचिता और गोपनीयता बरकरार रहे।

Share This Article