बंगाल में TMC का आखिरी किला ढहा! ‘पुष्पा’ बने जहांगीर ने मैदान छोड़ा, फलता में आज पुनर्मतदान : BJP की ऐतिहासिक जीत लगभग तय

KK Sagar
5 Min Read

पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को होने वाला फलता विधानसभा पुनर्मतदान अब सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक भविष्य की अग्निपरीक्षा बन गया है। दक्षिण 24 परगना जिले की फलता सीट, जिसे पिछले 15 वर्षों से टीएमसी का अभेद्य किला माना जाता था, अब पूरी तरह दरकता नजर आ रहा है।

2026 विधानसभा चुनाव में टीएमसी सरकार की करारी हार के बाद राज्य की इस आखिरी बची सीट पर भी पार्टी का जनाधार बिखरता दिख रहा है। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने मतदान से महज दो दिन पहले चुनाव मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि फलता सीट पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

‘पुष्पा झुकेगा नहीं’ बोलने वाले जहांगीर ने किया सरेंडर

चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान पूरे इलाके में सबसे चर्चित चेहरा बने हुए थे। उन्होंने खुद को फिल्म Pushpa: The Rise के किरदार की तरह पेश किया था। जनसभाओं में वे हाथ चमकाते हुए बार-बार कहते थे — “पुष्पा झुकेगा नहीं…”

इतना ही नहीं, मतदान से पहले उन्होंने चुनाव ड्यूटी में तैनात पुलिस ऑब्जर्वर अजयपाल शर्मा को भी खुले मंच से चुनौती दी थी कि वह किसी प्रशासनिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। लेकिन जैसे ही राज्य में टीएमसी सत्ता से बाहर हुई और फलता में दोबारा चुनाव की घोषणा हुई, वही ‘पुष्पा’ बने जहांगीर अचानक बैकफुट पर आ गए।

अब सोशल मीडिया पर विपक्ष टीएमसी पर तंज कस रहा है कि जो नेता खुद को “झुकने वाला नहीं” बता रहा था, उसने वोटिंग से पहले ही हथियार डाल दिए।

अभिषेक बनर्जी का ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ भी सवालों में

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी का चर्चित “डायमंड हार्बर मॉडल” लंबे समय से बंगाल राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। लेकिन विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद अब उसी मॉडल पर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जहांगीर खान ने मैदान छोड़ने की घोषणा करने से पहले अभिषेक बनर्जी से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह से फलता में भाजपा पूरी ताकत झोंक रही थी, जबकि टीएमसी का कोई बड़ा नेता प्रचार में नजर नहीं आया। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया और अंततः उम्मीदवार ने ही पीछे हटने का फैसला कर लिया।

अब सीधा मुकाबला BJP और कांग्रेस के बीच

फलता सीट पर अब मुख्य मुकाबला भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा और कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मोल्ला के बीच माना जा रहा है। इसके अलावा माकपा के शंभुनाथ कुर्मी, निर्दलीय दीप हाटी और चंद्रकांत राय भी मैदान में हैं।

अगर भाजपा यहां जीत दर्ज करती है, तो 2026 विधानसभा चुनाव में उसकी कुल सीटें बढ़कर 208 तक पहुंच जाएंगी, जो बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक आंकड़ा माना जाएगा।

धांधली के बाद दोबारा मतदान, सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम

चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को मतदान के दौरान कथित धांधली और हिंसा की शिकायतों के बाद फलता सीट का चुनाव रद्द कर दिया था। अब गुरुवार 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना 24 मई को होगी।

इस बार सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दी गई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के मुताबिक, पिछली बार जहां हर बूथ पर सिर्फ 4 केंद्रीय बलों के जवान थे, वहीं इस बार प्रत्येक बूथ पर 8 केंद्रीय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।

फलता के 285 मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए करीब 35 कंपनियां केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनात की गई हैं। प्रशासन का दावा है कि इस बार धांधली की “रत्ती भर भी गुंजाइश” नहीं छोड़ी जाएगी।

बंगाल की राजनीति में बड़ा संदेश

फलता का यह पुनर्मतदान अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। इसे ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के अंत के बाद टीएमसी के राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

एक समय टीएमसी का सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले इलाके में उम्मीदवार का मैदान छोड़ देना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद जमीनी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

Share This Article
उत्कृष्ट, निष्पक्ष, पारदर्शिता और ईमानदारी - पत्रकारिता की पहचान है k k sagar....✍️....