डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले एक बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए कोलकाता से जफर रियाज उर्फ रिजवी नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। आरोपित पर भारतीय सुरक्षा से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारियां पड़ोसी देश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को सौंपने का संगीन आरोप है। NIA के मुताबिक जफर रियाज कोई नौसिखिया नहीं, बल्कि जासूसी का पुराना खिलाड़ी है जो पहले भी ऐसे ही एक मामले में दोषी करार दिया जा चुका है।
मुख्य बातें: जिस पर टिकी है पूरी जांच
पुरानी हिस्ट्री: आरोपित पहले भी जासूसी के मामले में सजा पा चुका है।
लुक आउट सर्कुलर: भागने की फिराक में था आरोपित, NIA ने पहले ही जारी कर रखा था एलओसी।
हनी ट्रैप और लालच: पाकिस्तानी पत्नी, बच्चों की नागरिकता और पैसों के लालच में देश से गद्दारी।
डिजिटल साजिश: भारतीय नंबरों के OTP पाकिस्तान भेजकर एक्टिव कराए जा रहे थे वॉट्सऐप अकाउंट।
वॉट्सऐप और OTP का खेल: ऐसे रची जा रही थी भारत विरोधी साजिश
NIA की शुरुआती जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह है जासूसी का ‘डिजिटल मॉड्यूल’। जफर रियाज भारत में सक्रिय अन्य जासूसों और संदिग्धों की मदद के लिए भारतीय मोबाइल नंबरों के वन टाइम पासवर्ड पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजता था। इन OTP के जरिए पाकिस्तान में बैठे आका भारत के नंबरों पर वॉट्सऐप अकाउंट एक्टिवेट करते थे। इन्हीं फर्जी खातों के जरिए पाकिस्तान के लिए काम करने वाले एक अन्य आरोपी मोतीराम जाट से संपर्क साधा जाता था, ताकि भारतीय सुरक्षा बलों की मूवमेंट और अन्य गोपनीय दस्तावेज बिना किसी रोक-टोक के पाकिस्तान भेजे जा सकें।
पाकिस्तानी कनेक्शन: प्यार, पैसा और नागरिकता का जाल
जांच एजेंसी के अनुसार जफर रियाज का पाकिस्तान से गहरा और पुराना नाता है। उसकी शादी एक पाकिस्तानी महिला से हुई है और उसके बच्चे भी वहीं के नागरिक हैं। साल 2005 से जफर लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच आता-जाता रहा। इसी दौरान वह पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के संपर्क में आया। पाकिस्तानी एजेंसियों ने जफर की इसी मजबूरी और कमजोरी का फायदा उठाया। उसे भारी-भरकम पैसे और पाकिस्तान की पक्की नागरिकता देने का लालच देकर भारत के खिलाफ जासूसी के दलदल में धकेल दिया गया।
भगोड़ा घोषित होने ही वाला था जफर
NIA जफर रियाज पर लंबे समय से नजर रख रही थी। वह कानून के शिकंजे से बचने की कोशिश में था, जिसके चलते एजेंसी ने उसके खिलाफ पहले ही लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया था। अदालत के जरिए उसे भगोड़ा अपराधी घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया भी अंतिम चरण में थी, लेकिन इससे पहले ही एनआईए की टीम ने उसे दबोच लिया। एनआईए अब जफर को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस जासूसी नेटवर्क के तार भारत के और किन-किन शहरों से जुड़े हैं और अब तक कौन-कौन सी गोपनीय सूचनाएं सरहद पार भेजी जा चुकी हैं।

