डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: ‘या तो मेरे सुहाग को जिंदा ढूंढकर लाओ, या उन्हें शहीद घोषित करो।’ यह चीख उस अभागी पत्नी की है, जिसका पति देश की रक्षा करते-करते तीन साल पहले अचानक गायब हो गया। सारंडा के घने जंगलों से रहस्यमय तरीके से लापता हुए CRPF 197 बटालियन के जांबाज जवान बादल मुर्मू मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुफिया इनपुट सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों ने बादल मुर्मू की हत्या कर दी है, लेकिन पुलिस और प्रशासन शव न मिलने के तकनीकी पेंच में उलझा हुआ है। नतीजा यह है कि एक मेडल विजेता जवान का परिवार आज पाई-पाई को मोहताज है।
खुफिया इनपुट का बड़ा खुलासा: सरेंडर कर चुके नक्सलियों ने उगला सच
इंटेलिजेंस ब्यूरो ने हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले 25 माओवादियों से कड़ी पूछताछ की। इस दौरान जो सच सामने आया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
अपहरण और हत्या: 6 जनवरी 2023 को चाईबासा के सिंहपोखरिया से लापता हुए बादल मुर्मू और उनकी महिला साथी को माओवादी अगवा कर टोंटो थाना क्षेत्र के तुम्बाहाका गांव ले गए थे।
शीर्ष नक्सलियों का हाथ: अपहरण के महज 3-4 दिनों के भीतर ही शीर्ष माओवादी अनल के दस्ते के खूंखार सदस्यों—अपटन, सिंगराय और सुशांत उर्फ अनमोल—ने दोनों की निर्मम हत्या कर दी थी।
खत्म हुए गुनहगार, पर सबूत गायब: राहत की बात सिर्फ इतनी है कि इस हत्याकांड में शामिल अपटन, अनल, सिंगराय और सुशांत सुरक्षाबलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं। लेकिन उन्होंने शवों को कहां छिपाया, यह राज उन्हीं के साथ दफन हो गया।

