जमुई। बिहार के जमुई जिले से एक अनोखी प्रेम कहानी सामने आई है, जो इन दिनों पूरे इलाके के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां BPSC शिक्षिका नयनश्री ने अपनी फुफेरी बहन राखी कुमारी से विवाह कर लिया। शादी से पहले राखी ने जेंडर ट्रांजिशन करवाकर अपना नाम राहुल रख लिया, जिसके बाद दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।
जानकारी के अनुसार, दोनों जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड के हरला गांव की रहने वाली हैं। बचपन से साथ पढ़ने-बढ़ने के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह रिश्ता धीरे-धीरे प्रेम में बदल गया। वर्ष 2023 में दोनों पटना में BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए गई थीं। बाद में नयनश्री का चयन शिक्षक पद पर हो गया और वर्तमान में वह प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं।
बताया जाता है कि शादी के उद्देश्य से राखी ने करीब छह महीने पहले जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया शुरू की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रक्रिया पर लगभग 8 लाख रुपये खर्च हुए, जिसमें कुछ राशि लोन के माध्यम से जुटाई गई। जेंडर ट्रांजिशन के बाद राखी ने अपना नाम बदलकर राहुल रख लिया।
31 मई को दोनों ने लक्ष्मीपुर स्थित मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। राहुल ने नयनश्री की मांग में सिंदूर भरकर विवाह की रस्म पूरी की। बताया जा रहा है कि परिवार के अधिकांश सदस्यों को शादी की जानकारी पहले से नहीं थी और विवाह के बाद ही उन्हें पूरे मामले का पता चला।
यह विवाह अब पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां कुछ लोग इसे प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं के आधार पर इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
बहरहाल, यह मामला केवल दो व्यक्तियों के निजी जीवन का नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का विषय भी बन गया है। सवाल यह है कि क्या इस तरह के कदम समाज के लिए स्वीकार्य हैं और यदि कुछ लोग इसे स्वीकार भी करते हैं, तो इससे पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों तक क्या संदेश पहुंचेगा? यह एक गंभीर और विचारणीय विषय है। एक पक्ष इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद के अधिकार के रूप में देखता है, वहीं दूसरा पक्ष इसे प्रकृति के स्थापित नियमों और पारिवारिक रिश्तों की पारंपरिक मर्यादाओं के विपरीत मानता है। ऐसे में इस तरह की घटनाओं के सामाजिक प्रभाव, नैतिक पक्ष और भविष्य में पड़ने वाले असर पर व्यापक चर्चा और चिंतन की आवश्यकता है। अंततः यह समाज को तय करना है कि वह इसे किस दृष्टि से देखता है, लेकिन इतना निश्चित है कि इस तरह की घटनाएं कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती हैं, जिन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

