डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के किसानों के लिए एक बेहद गर्व करने वाली खबर है। अब सुदूर गांवों के खेतों में उपजे रसीले आमों का स्वाद सात समंदर पार लंदन (यूके) के लोग भी चखेंगे। पूर्वी सिंहभूम जिले से आमों की पहली इंटरनेशनल खेप को लंदन के लिए रवाना कर दिया गया है। यह पहली बार है जब जिले के आमों को सीधे एक वैश्विक और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिला है, जिससे स्थानीय किसानों में खुशी की लहर है।
डेढ़ टन आमों का हुआ एक्सपोर्ट, उपायुक्त ने दिखाई हरी झंडी
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से लगभग 1.5 टन (डेढ़ टन) आमों का निर्यात किया गया है। पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन ने समाहरणालय परिसर से आमों से लदे ट्रक को नजदीकी पोर्ट के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पूर्वी सिंहभूम उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि यह जिला और यहां के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। हमारे किसानों की उपज अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रही है। यह उनकी आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को एक नई पहचान देने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
कैसे मुमकिन हुआ ‘लोकल से ग्लोबल’ का यह सफर?
झारखंड के इस सुदूर इलाके से लंदन तक आम भेजने की राह इतनी आसान नहीं थी। इसके पीछे एक सुनियोजित व्यवस्था ने काम किया।
FPO की ताकत: आमों को इकट्ठा करने और उसकी सप्लाई का पूरा जिम्मा जिले के ही किसान उत्पादक संगठन ने संभाला। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और मुनाफा सीधे किसानों तक पहुंचा।
कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स: लंदन भेजने के लिए आमों की क्वालिटी की बेहद बारीकी से जांच की गई। इंटरनेशनल मार्केट के मानकों के अनुरूप ही इनकी खास पैकेजिंग की गई ताकि सफर के दौरान आम फ्रेश रहें।
किसानों के लिए खुलेंगे प्रगति के नए द्वार
प्रशासन का मानना है कि इस सफल शुरुआत के बाद जिले के दूसरे बागवानी और कृषि उत्पादों (जैसे सब्जियां और अन्य फल) के लिए भी वैश्विक बाजार के दरवाजे खुलेंगे। वैज्ञानिकों के सहयोग से की जा रही खेती और बेहतर क्वालिटी कंट्रोल की बदौलत आने वाले दिनों में पूर्वी सिंहभूम के अन्य उत्पाद भी विदेशों में धूम मचाते नजर आ सकते हैं। इस पहल से न सिर्फ किसानों को अपनी फसल का बेहतरीन मूल्य मिल रहा है, बल्कि दूसरे युवाओं और किसानों को भी आधुनिक और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड बागवानी से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

