10 जून से 15 अक्टूबर तक बालू उठाव पर रोक, एनजीटी के प्रतिबंध से बढ़ेगी चुनौती

KK Sagar
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राज्य के 444 बालू घाटों में सिर्फ 14 से हो रही वैध निकासी, कालाबाजारी पर भी नहीं लग रही लगाम

रांची। झारखंड में 10 जून से 15 अक्टूबर तक बालू उठाव पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के प्रतिबंध के लागू होने के साथ ही राज्य में बालू संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। मॉनसून अवधि के दौरान बालू खनन और उठाव पर रोक के कारण निर्माण कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।

जानकारी के अनुसार राज्य के 444 बालू घाटों में से वर्तमान में केवल 14 घाटों से ही वैध बालू निकासी शुरू हो पाई है। वहीं राजधानी रांची के दो बालू घाटों की लीज डीड पूरी होने के बावजूद तकनीकी कारणों से अब तक बालू उठाव शुरू नहीं हो सका है।

विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून के दौरान राज्य में निर्माण कार्यों और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए 4 से 5 करोड़ सीएफटी बालू की आवश्यकता होती है। ऐसे में वैध आपूर्ति सीमित होने से बाजार में बालू की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

इधर प्रतिबंध और सीमित वैध आपूर्ति के बीच अवैध बालू कारोबार लगातार जारी है। सूत्रों के अनुसार कालाबाजारी में एक हाइवा बालू की कीमत 32 हजार रुपये तक पहुंच गई है। इससे निर्माण लागत बढ़ने के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं और भवन निर्माण से जुड़े लोगों की परेशानी भी बढ़ सकती है।

बालू संकट और अवैध खनन को लेकर प्रशासन की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मॉनसून अवधि में वैध आपूर्ति सुनिश्चित करने और अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।

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