डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने अब एक बड़ा यू-टर्न ले लिया है। ब्रह्मचारी का कहना है कि उन्होंने यह मामला मथुरा के देवा आश्रम के महंत रामचंद्र दास के दबाव में आकर दर्ज कराया था।
मंगलवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि रामचंद्र दास ने उन्हें गुमराह किया और शंकराचार्य के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराने के लिए मजबूर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी साजिश में कई सरकारी अधिकारी भी शामिल थे।
मेरे पास व्हाट्सऐप चैट के सबूत हैं
वीडियो में ब्रह्मचारी ने कहा कि रामचंद्र दास ने मुझे बर्बाद कर दिया, मुझे प्रताड़ित किया गया और मुझ पर दबाव बनाया गया। उन्होंने इस काम के लिए मेरा इस्तेमाल क्यों किया? उन्होंने जल्द ही इस मामले में सबूत पेश करने का संकल्प लेते हुए दावा किया कि मेरे पास व्हाट्सऐप चैट के रिकॉर्ड हैं, जिसमें दास मुझे बता रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ मुकदमा कैसे दर्ज कराना है।
कौन हैं रामचंद्र दास?
रामचंद्र दास, जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (चांसलर) जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी और लंबे समय से उनके करीबी सहयोगी हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी भी पहले रामभद्राचार्य के सहयोगी रह चुके हैं।
गुरु की हत्या की साजिश का लगाया आरोप
रामचंद्र दास को पाखंडी और धोखेबाज बताते हुए ब्रह्मचारी ने कहा कि उन्होंने मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है कि दास ने फर्जी वसीयत बनाकर देवा आश्रम पर अवैध कब्जा कर लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करेगी, तो मैं अदालत जाऊंगा। इसके अलावा ब्रह्मचारी ने दास पर अपने गुरु रामभद्राचार्य की हत्या की साजिश रचने का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर उनके गुरु की हत्या होती है, तो इसके लिए दास ही जिम्मेदार होंगे। फिलहाल इन आरोपों पर रामचंद्र दास या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रतिनिधियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या था पूरा मामला?
जनवरी में दर्ज कराई थी शिकायत: इस साल जनवरी में आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि धार्मिक सभाओं (जिसमें 2025 का कुंभ मेला और 2026 का माघ मेला शामिल है) के दौरान गुरु सेवा के नाम पर नाबालिगों का यौन उत्पीड़न किया गया।
अदालत का आदेश: 21 फरवरी को विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने प्रयागराज पुलिस को पॉक्सो अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर स्वतंत्र जांच शुरू करने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट से मिली राहत: 25 मार्च को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट ने मेडिकल साक्ष्यों में विसंगतियों और इस बात पर ध्यान दिया था कि नाबालिगों ने उत्पीड़न के बारे में अभिभावकों के बजाय अजनबियों को बताया था। अदालत ने यह भी कहा था कि ये आरोप माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और स्थानीय प्रशासन के बीच हुए विवाद के ठीक बाद सामने आए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी दी राहत: 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने शंकराचार्य की जमानत के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया था, जिससे 56 वर्षीय संत को गिरफ्तारी से बड़ी राहत मिली थी।

