पोटका में ब्रेन मलेरिया का तांडव: झोलाछाप के चक्कर में गई 8 साल की मासूम की जान, एक साल की बहन वेंटिलेटर पर

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: मानसून और बदलते मौसम के बीच पोटका क्षेत्र में ब्रेन मलेरिया ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। कंदर गांव में इस जानलेवा बीमारी ने एक 8 वर्षीय मासूम बच्ची की जान ले ली है, जबकि उसकी महज एक साल की छोटी बहन अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

झोलाछाप के इलाज ने छीनी मासूम की सांसें
​कंदर गांव के रहने वाले महावीर सरदार की 8 वर्षीय बेटी सुबोला सरदार को कुछ दिन पहले बुखार आया था। जागरूकता की कमी के कारण परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय एक स्थानीय झोलाछाप डॉक्टर से उसका इलाज कराते रहे। जब झोलाछाप की दवाइयों से बच्ची की हालत और बिगड़ गई, तब उसे आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक मलेरिया का संक्रमण बच्ची के दिमाग तक पहुंच चुका था और डॉक्टरों के लाख प्रयासों के बाद भी सुबोला को बचाया नहीं जा सका।

एक साल की खुशबू की हालत अत्यंत गंभीर
​महावीर सरदार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बड़ी बेटी को खोने के बाद अब उनकी एक वर्षीय छोटी बेटी खुशबू सरदार भी ब्रेन मलेरिया की चपेट में है। खुशबू का इलाज हाता स्थित तारा सेवा सदन में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक मासूम की हालत अत्यंत चिंताजनक और गंभीर बनी हुई है।

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इलाके में तेजी से फैल रहा है संक्रमण
​ब्रेन मलेरिया का प्रकोप सिर्फ एक घर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे पैर पसार रहा है। गोमिया साईं की 12 वर्षीय अमीषा भूमिज भी इस खतरनाक मलेरिया से संक्रमित हैं। सेरेंगडीह के 17 वर्षीय भीम सरदार भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। इन दोनों मरीजों का इलाज भी फिलहाल तारा सेवा सदन में जारी है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह: सावधानी ही एकमात्र बचाव है
​तारा सेवा सदन के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ए.के. लाल ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ब्रेन मलेरिया में समय पर सही इलाज मिलना सबसे जरूरी है। झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में मरीज की जान जोखिम में न डालें। डॉ. लाल ने क्षेत्र के लोगों से तुरंत कुछ उपाय अपनाने की अपील की है।
​मच्छरदानी का अनिवार्य प्रयोग: रात हो या दिन, सोते समय नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करें।
​शाम होते ही सतर्कता: शाम ढलते ही घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दें ताकि मच्छर भीतर न आ सकें।
​जलजमाव पर रोक: घर के आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। रुके हुए पानी में ही मलेरिया के मच्छर पनपते हैं।
​DDT का छिड़काव: मच्छरों के प्रजनन वाले स्थानों और नालियों में नियमित रूप से डीडीटी या कीटनाशक का छिड़काव कराएं।

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