भरत तिवारी एनकाउंटर में आरोपी SDPO राजेश शर्मा की मुश्किलें बढ़ी, खुली 19 साल पुरानी फाइल

Neelam
By Neelam
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भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर विवाद के बीच अब 19 साल पुराने मुजफ्फरपुर के कथित फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले ने फिर से सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दी है। इस मामले में तत्कालीन सदर थाना प्रभारी और वर्तमान डीएसपी राजेश शर्मा का नाम एक बार फिर चर्चा में है। भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में आरोपी बनाए गए एसडीपीओ राजेश शर्मा 19 वर्ष भी एक एनकाउंटर को लेकर सुर्खियों में थे।

19 साल पहले हुई मुठभेड़ में राजेश शर्मा पर लगे थे कई गंभीर आरोप

19 साल पहले भी इस कथित एनकाउंटर को लेकर काफी विवाद हुआ था और उस समय राजेश शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। मृतक के परिजनों ने सीआईडी जांच और चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए वर्ष 2013 में मुजफ्फरपुर कोर्ट में सदर थाने के तत्कालीन थानेदार राजेश शर्मा सहित चार थाना प्रभारी और कई अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। हालांकि, गवाहों के अभाव में यह मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित है। अब एक बार फिर इसके खुलने की संभावना जताई जा रही है।

सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तिथि निर्धारित

दरअसल, उस मामले को फिर से खोलने के लिए तथाकथित मुठभेड़ में मारे गए मनीष महिवाल की मां अनीता देवी ने मानवाधिकार आयोग के अधिवक्ता एस के झा के माध्यम से न्यायालय में आवेदन दिया है। जिसको न्यायालय ने सुनवाई करते हुए सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।

2007 में हुई थी मुठभेड़

यह मामला मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र का है। 4 नवंबर 2007 की सुबह करीब 4 बजे ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित एमआईटी कॉलेज के समीप पुलिस मुठभेड़ में तीन युवकों की मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान सदर थाना क्षेत्र के लहलादपुर पताही निवासी मुकुल ठाकुर, काजी मोहम्मदपुर निवासी मनीष शर्मा और शिवहर जिले के धनकौल निवासी सुबोध कुमार सिंह के रूप में हुई थी।

मानवाधिकार आयोग ने माना था फर्जी मुठभेड़

पुलिस का दावा था कि वाहन जांच के दौरान गाड़ी रोकने पर तीनों युवकों ने पुलिस पर 22 राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई और तीनों की मौत हो गई। मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को कथित फर्जी एनकाउंटर करार दिया था। वहीं, मनीष शर्मा की मां ने भी आरोप लगाया था कि उनके बेटे की फर्जी मुठभेड़ में हत्या की गई। वहीं, इस मुठभेड़ को लेकर स्थानीय लोगों के विरोध के बाद मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई थी।

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