बिहार में पंचायत चुनाव समय पर ही होंगे। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से चुनाव की तैयारियां बिल्कुल तय कार्यक्रम के अनुसार चल रही हैं और इसमें किसी भी तरह की देरी की कोई गुंजाइश नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस बार भी चुनाव में आरक्षण रोस्टर का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।
आरक्षण रोस्टर का पूरी तरह होगा पालन
अब तक कहा जा रहा था कि इस बार पंचायत चुनाव तय समय यानी दिसंबर 2026 शायद ही पूरा हो सके। हालांकि, बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ कर दिया कि बिहार में समय पर पंचायत चुनाव होंगे। मंत्री ने बताया कि इस बार भी पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर का पूरी तरह पालन किया जाएगा। दीपक प्रकाश ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार लागू होगी।
आरक्षण के लिए 2011 की जनसंख्या आधार
दीपक प्रकाश ने बताया कि आरक्षण के रोस्टर को लेकर निर्वाचन आयोग के निर्देश में सारा काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि सभी जगह जनसंख्या का प्रकाशन किया गया है। आरक्षण के लिए 2011 की जनसंख्या को आधार बनाया है। इसके हिसाब से ही आरक्षण का रोस्टर लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण के लिए कुल आबादी में से उस आबादी का प्रतिशत देखा जाएगा, जिसे आरक्षण दिया जाना है। दीपक प्रकाश ने कहा कि अतिपिछड़ा समाज के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है, महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया जाता है। और बाकी जो बचती हैं, वो अनारक्षित सीटें हो जाती हैं।
नया परिसीमन नहीं किया जाएगा
पंचायती राज मंत्री ने चुनाव से पहले होने वाले परिसीमन को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ कहा है कि इस बार चुनाव से पहले पंचायतों का कोई नया परिसीमन नहीं किया जाएगा. इसका मतलब यह हुआ कि सभी पंचायतों और वार्डों की सीमाएं जैसी अभी हैं, वैसी ही रहेंगी और पुरानी सीमाओं के आधार पर ही वोट डाले जाएंगे।
इस साल के अंत में हो सकते हैं पंचायत चुनाव
बता दें कि बिहार में इस साल के आखिर में पंचायत चुनाव हो सकते हैं। इस बार मुखिया और सरपंच के 8053 पदों पर मुकाबला होगा। इसके अलावा, सबसे ज्यादा संख्या वार्ड सदस्यों और पंचों की होगी, जिनके लिए 1,09,635 पदों पर चुनाव कराए जाएंगे। पंचायत समिति के 11085 और जिला परिषद के 1160 पदों के लिए भी प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाएंगे।

