इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सहरसा विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता, जिन्हें आईपी गुप्ता के नाम से जाना जाता है, ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने अपने समाज और पार्टी से जुड़े विभिन्न मुद्दों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा और एक पांच सूत्री ज्ञापन सौंपा। इससे पहले आईपी गुप्ता ने र्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और स्वास्थ्य मंत्री निशांत से भी मुलाकात की थी। बता दें कि आईपी गुप्ता की पार्टी फिलहाल बिहार में महागठबंधन का हिस्सा हैं।
पान समुदाय के हितों का मुद्दा उठाया
मुलाकात के दौरान विधायक ने मुख्य रूप से तांती, तत्वा और पान समुदाय के हितों की रक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन समुदायों के युवाओं को सरकारी नौकरियों में जो कठिनाइयां आ रही हैं, उन्हें दूर करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज के साथ हो रहे कथित भेदभाव को समाप्त करने के लिए ठोस नीतिगत निर्णय लिए जाने की आवश्यकता है।
पान जाति का पुराना दर्जा बहाल करने की मांग
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग पान जाति का पुराना दर्जा बहाल करने की है। विधायक की मांग है कि पान (तांती) की खेती करने वाली जातियों को अति पिछड़ा वर्ग की सूची से हटाकर अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल किया जाए। विधायक का तर्क है कि बिहार में 113 जातियां अति पिछड़ी सूची में हैं, लेकिन आरक्षण का लाभ केवल 12-13 सक्षम जातियां ही उठा पा रही हैं।
मुख्यमंत्री से मिला आश्वासन
सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद आईपी गुप्ता ने सोशल मीडिया एक्स पर तस्वीर शेयर कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया है, वे सारे विषयों पर गंभीरता से विचार करेंगे। विधायक आईपी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ज्ञापन में शामिल सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना। मुख्यमंत्री ने इन संवेदनशील मुद्दों पर विचार करने और जनहित में उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से भी की थी मुलाकात
मुख्यमंत्री से मुलाकात के पहले आईपी गुप्ती ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत से भी मुलाकात की थी। 2 जुलाई को हुई इस मुलाकात की फोटो भी आईपी गुप्ता ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था। जिसमें उन्होंने लिखा था, माननीय मंत्री श्री निशात जी से मिलकर सहरसा सदर अस्पताल की वर्त्तमान हालत, डॉक्टर्स, ANM आदि के कमी से जूझता अस्तपाल मैनेजमेंट, आउटसोर्सिंग, एम्बुलेंस चालक की समस्या, रोगी कल्याण समिति आदि पर विस्तृत चर्चा हुआ। जरा सोचिए कि सदर अस्पताल में स्वीकृत 441 पद में कुल डॉक्टर सहित 131 कर्मियों की मौजूदगी है और सरकारी बड़े दावे अलग। माननीय मंत्री ने मुझे आश्वस्त किया है कि वे मेरे आवेदन पर गंभीरता पूर्वक विचार करेंगे और प्राथमिकता के आधार पर इन समस्याओं के निवारण करेंगे।’

