अपराधियों में हड़कंप! जमशेदपुर के सबसे हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में बड़ी कामयाबी, राघवेंद्र जेल भेजा गया

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: लौहनगरी को दहला देने वाले चर्चित डीडी बार मर्डर केस में फरार अपराधियों पर जमशेदपुर पुलिस का शिकंजा इस कदर कसा कि रसूखदारों के हौसले पस्त हो गए। पुलिस की चौतरफा दबिश और ताबड़तोड़ छापेमारी के खौफ से घबराकर आखिरकार मुख्य आरोपियों में शामिल कदमा निवासी राघवेंद्र ने मंगलवार को चुपचाप अदालत में सरेंडर कर दिया। अदालत ने राघवेंद्र को तुरंत न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि हत्याकांड की साजिश की अंतिम कड़ियों को जोड़ने और गहरे राज उगलवाने के लिए पुलिस जल्द ही अदालत में राघवेंद्र की रिमांड याचिका दायर करेगी।

अब तक 13 गिरफ्तार: शिकंजे में साजिशकर्ता
​हिमांशु सिंह की सरेआम बेरहमी से की गई हत्या और प्रत्यूष आनंद पर हुए जानलेवा हमले के बाद से ही जमशेदपुर पुलिस एक्शन मोड में है। पुलिस के बढ़ते दबाव का ही नतीजा है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक कानून का शिकंजा कई बड़े चेहरों पर कस चुका है।

सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपी: नीरज सिंह, राहुल दुबे, विजय महानंद, विश्वनाथ मंडल समेत कुल 13 आरोपी अब तक जेल भेजे जा चुके हैं।
रिमांड पर उगले राज: इससे पहले मुख्य साजिशकर्ता नीरज सिंह और विश्वनाथ मंडल को 3 दिनों की पुलिस रिमांड पर लेकर कड़ी पूछताछ की गई थी, जिससे जांच टीम के हाथ कई सनसनीखेज और महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं।

पुलिस का अगला कदम: इन मोर्चों पर टिकी है जांच
​राघवेंद्र के सरेंडर के बाद जमशेदपुर पुलिस की जांच अब अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। पुलिस अब इन तीन खास रणनीतियों पर काम कर रही है।
हथियारों की बरामदगी: वारदात को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किए गए अवैध हथियारों को रिकवर करना अब पुलिस की पहली प्राथमिकता है।
क्राइम सीन और असली मोटिव: रिमांड पर आने के बाद राघवेंद्र से पूछताछ कर हत्या के असली मकसद और पर्दे के पीछे छिपे अन्य मददगारों को बेनकाब किया जाएगा।
वैज्ञानिक साक्ष्यों का मिलान: वारदात के समय के CCTV फुटेज और सभी आरोपियों के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड्स का बारीकी से मिलान कर कोर्ट के लिए पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं।

कानून से भागना नामुमकिन है
जमशेदपुर पुलिस ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ संदेश दिया है कि शहर की फिजा बिगाड़ने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस के इसी चौतरफा दबाव के कारण ही आरोपियों के पास सरेंडर करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा। फिलहाल मामले की निष्पक्ष और बेहद बारीकी से जांच जारी है।

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