ब्रेन मलेरिया से पीड़ित सीआरपीएफ जवान ने तोड़ा दम, अस्पताल पर उठे सवाल

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : कोल्हान क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, एमजीएम में जीवनरक्षक उपकरणों और सुविधाओं की भारी कमी मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है। वेंटिलेटर की सुविधा न होने के कारण अस्पताल में तीन दिनों के भीतर दो लोगों की मौत हो चुकी है। ताजा मामला सीआरपीएफ जवान पिंटू कुमार साव (35 वर्ष) का है, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

ब्रेन मलेरिया और गंभीर संक्रमण का नहीं मिल सका सही इलाज
​बिहार के वैशाली जिले के फरीदपुर निवासी पिंटू कुमार साव पश्चिमी सिंहभूम स्थित सीआरपीएफ की 197वीं बटालियन में तैनात थे और वर्तमान में मुसाबनी में ड्यूटी पर थे।
तबीयत बिगड़ी: मंगलवार को तेज बुखार और कमजोरी के बाद उन्हें जादूगोड़ा कैंप ले जाया गया, जहां से एमजीएम जमशेदपुर रेफर किया गया।
अस्पताल का रवैया: एमजीएम में जांच के दौरान उनमें ब्रेन मलेरिया और मल्टी-ऑर्गन इंफेक्शन की पुष्टि हुई। डॉक्टरों की टीम ने प्रयास तो किए, लेकिन वेंटिलेटर न होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सवालों के घेरे में अस्पताल: अस्पताल प्रशासन ने पहले ही परिजनों को वेंटिलेटर की कमी की बात कहकर दूसरे अस्पताल ले जाने को कह दिया था, जिससे सरकारी व्यवस्था की लाचारी साफ नजर आती है।

तीन दिन में दूसरी मौत, सोमवार को हुआ था हंगामा
​वेंटिलेटर न होने से मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले सोमवार दोपहर लगभग 3:00 बजे आजाद बस्ती निवासी मुस्कान खातून (23 वर्ष) की भी वेंटिलेटर के अभाव में मौत हो चुकी है। उस दौरान परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए करीब आधे घंटे तक हंगामा किया था। इसके बावजूद अस्पताल की लचर व्यवस्था में कोई सुधार देखने को नहीं मिला।

जवान को दी गई अंतिम विदाई, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
​जवान पिंटू कुमार साव ने वर्ष 2017 में सीआरपीएफ जॉइन की थी और 2019 में उनकी शादी हुई थी। उनके पीछे पत्नी, 5 और 3 साल की दो बेटियां और महज 2 माह का एक छोटा बेटा छूट गया है। एमजीएम अस्पताल में सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों व जवानों ने उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव भेज दिया गया। घटना के बाद जिला सर्विलांस विभाग की टीम ने एमजीएम पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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