डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: जब पुलिस की गश्त कागजों पर दौड़ती है, तो सड़कों पर बेखौफ अपराधी दौड़ने लगते हैं। लौहनगरी जमशेदपुर में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा है। शहर के तीन पॉश और सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों उलीडीह, सोनारी और साकची में महज 18 घंटे के भीतर तीन महिलाओं से सोने की चेन छीन ली गई। यह सिर्फ तीन परिवारों के साथ हुई लूट का मामला नहीं है, बल्कि यह जमशेदपुर पुलिस की सुस्त गश्ती व्यवस्था और ढुलमुल कार्यशैली का वह रिपोर्ट कार्ड है, जिसने पूरे शहर को खौफ के साए में धकेल दिया है।
18 घंटे की तीन वारदातें: जब बेखौफ अपराधियों ने शहर को बनाया निशाना
उलीडीह (शंकोसाई): सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकली 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला आशा रानी सारंगी से पैदल आए बदमाश ने ढाई लाख रुपये की सोने की चेन झपट ली।
सोनारी (एरोड्रम रोड): शाम को टहल रही बुजुर्ग महिला अर्चना श्रीवास्तव को निशाना बनाया गया।
साकची (जुबिली पार्क गेट): देर शाम सोनारी निवासी चंदना दास से भी पार्क के पास चेन छीन ली गई।
उलीडीह की वारदात में स्नेचर का चेहरा और पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो चुकी है। सोनारी में वारदात के बाद भागते वक्त अपराधी हड़बड़ी में अपनी बाइक मौके पर ही छोड़कर भाग गए। अब सवाल यह उठता है कि जब बाइक का नंबर, गाड़ी और संदिग्ध का चेहरा पुलिस के पास उपलब्ध है, तब भी 18 घंटे बीत जाने के बाद एक भी स्नेचर सलाखों के पीछे क्यों नहीं है? जुबिली पार्क और एरोड्रम रोड जैसे इलाके, जहां पुलिस की पीसीआर और टाइगर्स मोबाइल की मौजूदगी का दावा किया जाता है, वहां अपराधी बेधड़क वारदातों को अंजाम देकर कैसे निकल रहे हैं? सुबह की वॉक हो या शाम की टहल कदमी, अब शहर की बुजुर्ग महिलाएं और गृहिणियां अपने ही घर के बाहर सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से शहरवासियों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस ने सिर्फ जांच का दावा करने के बजाय जमीनी स्तर पर सख्त कदम नहीं उठाए, तो जमशेदपुर में अपराधियों का मनोबल और बढ़ जाएगा।

