झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले के बाद अब उन कर्मचारियों ने भी मोर्चा खोल दिया है, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2014 के बाद JSSC-CGL के माध्यम से हुई है और जो अपने पदों पर काम कर रहे हैं। कर्मचारियों ने अपनी नियुक्तियों को लेकर स्पष्टता और न्याय की मांग करते हुए रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना शुरू कर दिया है।
धरना दे रहे कर्मचारियों का दावा है कि सरकार ने आंदोलन के दबाव में आकर JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें इस तरह मौखिक आदेश के आधार पर नौकरी से बाहर नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे वर्षों से अपने पदों पर कार्यरत हैं और उनके भविष्य को लेकर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
कर्मचारियों के मुताबिक, वर्ष 2014 से अब तक हुई संबंधित परीक्षाओं के जरिए नियुक्त करीब 2,000 कर्मचारियों की नौकरी पर सरकार के फैसले से संकट मंडरा रहा है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी नियुक्ति की सुरक्षा और भविष्य को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए भी तैयार हैं। उनका कहना है कि अंतिम फैसला अदालत में होगा।
गौरतलब है कि JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के विरोध में छात्रों ने 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन शुरू किया था। छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, पूरे मामले की CBI जांच कराना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल था।
अब सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद एक ओर जहां आंदोलनरत छात्रों की मांगों पर कार्रवाई हुई है, वहीं दूसरी ओर पहले से नियुक्त कर्मचारियों के आंदोलन ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

