पलामू के तरहसी प्रखंड की सेलारी पंचायत में बहेरा खाला के टेड़वा नाला पर पुल नहीं होने से करीब 100 घरों के ग्रामीणों की परेशानी लगातार तीसरे साल भी बरकरार है। बरसात शुरू होते ही नाले में तेज पानी आने से मुख्य आवागमन मार्ग पूरी तरह बाधित हो जाता है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बाजार जाने और रोजी-रोजगार के लिए आने-जाने पर पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार समस्या से निजात पाने के लिए उन्होंने आपस में चंदा जुटाकर सड़क बनाने का प्रयास किया था। इसके बाद स्थानीय विधायक के निजी खर्च से भी रास्ते में मटेरियल डलवाया गया, लेकिन बारिश के तेज बहाव में वह भी बह गया। ग्रामीणों का कहना है कि टेड़वा नाला पर पुल नहीं होने के कारण हर साल बरसात के तीन-चार महीने उनका संपर्क लगभग टूट जाता है। इस रास्ते का इस्तेमाल मेहता समाज सहित कई अन्य परिवार करते हैं और यह कई लोगों के लिए पूर्वजों से चला आ रहा प्रमुख मार्ग है।
बारिश के दौरान सबसे बड़ी परेशानी आपात स्थिति में होती है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी की तबीयत अचानक बिगड़ने, प्रसव या दुर्घटना की स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है। वहीं, स्कूली बच्चों को भी तेज बहाव वाले नाले को पार कर आना-जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे पिछले तीन वर्षों से प्रखंड कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने पंचायतों में विकास के लिए राशि और योजनाओं के दावों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि जब एक छोटे पुल का निर्माण नहीं हो पा रहा है तो विकास का लाभ गांव तक कैसे पहुंचेगा।
ग्रामीणों ने पलामू जिला प्रशासन, प्रखंड प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से टेड़वा नाला पर जल्द पुलिया या पुल का निर्माण कराने और पक्की सड़क बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से बरसात में करीब 100 घरों के लोगों का आवागमन सुचारु हो सकेगा और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार से जुड़ी परेशानियां दूर होंगी। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाना पड़े और नाले में तेज पानी बह रहा हो, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

