डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: खाकी की लापरवाही और सिस्टम की सुस्ती पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। जमशेदपुर के गोलमुरी थाना क्षेत्र में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पुलिस की हीलाहवाली के कारण पीड़िता के परिवार को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ा। आखिरकार जब मामला जमशेदपुर की विशेष पोक्सो अदालत पहुंचा, तब कहीं जाकर पुलिस की नींद टूटी। अदालत के कड़े रुख और स्पष्ट आदेश के बाद घटना के पूरे 41 दिन बीत जाने पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।
यह पूरा मामला आठ जुलाई का है, जब पीड़िता के घर के ऊपरी हिस्से में रहने वाले एक युवक पर नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा। घटना के अगले ही दिन, यानी नौ जुलाई को पीड़िता की मां न्याय की उम्मीद में अपनी फरियाद लेकर गोलमुरी थाने पहुंची थी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने पीड़िता का आवेदन लेने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित परिवार लगातार अधिकारियों और दफ्तरों के चक्कर काटता रहा, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
थक-हारकर पीड़िता की मां ने इंसाफ के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और जमशेदपुर कोर्ट में शिकायतवाद दर्ज कराया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष पोक्सो अदालत ने सात अगस्त को गोलमुरी थाना पुलिस को जांच के साथ तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
कोर्ट के आदेश के दबाव में गोलमुरी पुलिस ने 19 अगस्त को मामला दर्ज किया। केस दर्ज होने के बाद आनन-फानन में नाबालिग को मेडिकल जांच के लिए खासमहल स्थित सदर अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल मामले के जांच अधिकारी ने पीड़िता और उसकी मां का आधिकारिक बयान दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश में पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

