एनपीयू में भड़का छात्र आक्रोश, कुलपति का पुतला फूंक आपसू-एनएसयूआई-जेसीएम ने बुलंद की आवाज

Reena Sharma
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वित्तीय मामलों में जवाबदेही तय कर एफआईआर की मांग
मेदिनीनगर। नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) में कथित वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक अव्यवस्था एवं छात्रहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आपसू, एनएसयूआई एवं जेसीएम के संयुक्त तत्वावधान में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने एनपीयू कुलपति का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया।
वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठाए सवाल
छात्र नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों के भविष्य और सार्वजनिक धन से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था है। ऐसे में विश्वविद्यालय के वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का पालन होना आवश्यक है। यदि किसी भी मामले में वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आते हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता और विश्वविद्यालय परिवार के सामने रखी जानी चाहिए।
खरीद और भुगतान के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
संगठनों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में सामने आए विभिन्न वित्तीय मामलों को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन अब तक उन सवालों का संतोषजनक और सार्वजनिक जवाब नहीं मिला है। छात्र संगठनों ने मांग की कि खरीद, भुगतान, स्वीकृति एवं अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं से संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।
विश्वविद्यालय को सार्वजनिक संस्था बताया
आपसू, एनएसयूआई एवं जेसीएम नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि छात्रों और समाज की सार्वजनिक संस्था है। इसलिए विश्वविद्यालय के प्रत्येक निर्णय में नियम, पारदर्शिता और छात्रहित सर्वोच्च होना चाहिए। नेताओं ने कहा कि संस्थान से जुड़े प्रत्येक वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णय की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की मांग
छात्र संगठनों ने राज्य सरकार एवं राजभवन से मांग की कि एनपीयू में लगाए जा रहे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। संगठनों का कहना है कि मामले से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट आ चुकी है। यदि जांच में किसी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति पर किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय नुकसान प्रमाणित हुआ है, तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सार्वजनिक धन की वसूली सुनिश्चित की जाए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत द्वेष के लिए नहीं, बल्कि “क्लीन कैंपस और भ्रष्टाचार मुक्त विश्वविद्यालय” की मांग को लेकर है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यदि छात्र संगठनों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की जाती है, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा।
छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें
1. विश्वविद्यालय के वित्तीय मामलों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
2. खरीद एवं भुगतान से संबंधित अभिलेखों को सार्वजनिक किया जाए।
3. वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर दर्ज करते हुए कार्रवाई हो।
4. सार्वजनिक धन की वसूली सुनिश्चित की जाए।
5. विश्वविद्यालय में वित्तीय एवं प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
6. छात्रों से जुड़े शैक्षणिक एवं प्रशासनिक मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए।
सैकड़ों छात्र-छात्राएं रहे मौजूद
आपसू, एनएसयूआई एवं जेसीएम ने संयुक्त रूप से कहा कि जब तक विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रहित सुनिश्चित नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। मौके पर आपसू के राहुल दुबे, कमलेश कुमार पाण्डेय, रतन दुबे, सानिया अग्रवाल, राज नेहा चौबे, प्रिया प्रजापति, अभय चौरसिया, एनएसयूआई के अमरनाथ तिवारी, रिशु राज दुबे, मोहित राज, सत्यप्रकाश, जेसीएम से कौशल किशोर, सौरभ पाठक, दिनेश, फैजल समेत सैकड़ों छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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