गया में पंजाबी लंगर की मिसाल, 2014 से डेढ़ लाख तीर्थयात्रियों को मिला मुफ्त भोजन

Reena Sharma
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गया की पंजाबी धर्मशाला में पितृपक्ष मेले के दौरान पंजाब के विजय कुमार गुप्ता और उनके साथी वर्ष 2014 से निःशुल्क लंगर चला रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष अब तक करीब डेढ़ लाख तीर्थयात्री भोजन ग्रहण कर चुके हैं।

खुद की परेशानी से मिली सेवा की प्रेरणा

विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2013 में पिंडदान के लिए गया आने पर उन्हें भोजन की व्यवस्था में परेशानी हुई थी। इसके बाद उन्होंने दो दोस्तों के साथ मिलकर अगले साल से लंगर शुरू किया।

सुबह से राpत तक मिलता है पंजाबी भोजन

लंगर में सुबह, दोपहर, शाम और रात के भोजन की व्यवस्था रहती है। तीर्थयात्रियों को अलग-अलग व्यंजन निःशुल्क परोसे जाते हैं, ताकि उन्हें घर जैसा स्वाद मिल सके।

मेला खत्म होने के बाद भी जारी रहती है सेवा

आयोजक पितृपक्ष मेले की शुरुआत से दो दिन पहले लंगर शुरू करते हैं और समापन के दो दिन बाद तक सेवा जारी रखते हैं। इससे देर से लौटने वाले तीर्थयात्रियों को भी भोजन मिल पाता है।

होटल बंद होने पर यात्रियों को मिलती है राहत

विजय कुमार के अनुसार, मेला समाप्त होने के बाद कई होटल और रेस्टोरेंट बंद हो जाते हैं या भोजन की सुविधा सीमित हो जाती है। ऐसे में लंगर दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए मददगार साबित होता है।

तीर्थयात्रियों ने की सेवा की सराहना

लंगर में भोजन करने वाले श्रद्धालुओं ने स्वच्छ, स्वादिष्ट और मुफ्त भोजन की व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने विजय कुमार गुप्ता और उनके सहयोगियों को इस सेवा के लिए धन्यवाद दिया।

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