नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। मंगलवार को नवरात्रि का तीसरा दिन होने पर मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा भक्तों को साहस, शांति और शक्ति प्रदान करती हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
घंटे जैसी आकृति वाला मुकुट है मां की पहचान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है और उनकी दस भुजाएं अस्त्र-शस्त्रों से सुशोभित हैं। उनकी पूजा से भय दूर होने और आत्मविश्वास बढ़ने की मान्यता है। भक्त मां को लाल-पीले फूल और खीर का भोग अर्पित करते हैं।
नौ दिनों में होती है नौ देवियों की पूजा
नवरात्रि के नौ स्वरूपों में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। प्रत्येक दिन देवी के एक स्वरूप की पूजा कर भक्त सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
मंत्र जाप और आराधना से भक्तिमय माहौल
नवरात्रि के तीसरे दिन मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती पाठ और मंत्र जाप किया जाता है। मां चंद्रघंटा का मंत्र “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” का जाप कर श्रद्धालु सुख-शांति और साहस की कामना करते हैं।

