डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर:विजयदशमी के पावन अवसर पर इस्पात नगरी जमशेदपुर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों बिष्टुपुर, साकची, सोनारी, बर्मामाइंस, और टिनप्लेट सहित शहर के तमाम इलाकों में मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन से पहले पारंपरिक ‘सिंदूर खेला’ का पर्व अत्यंत उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान बंगाली समुदाय और शहरभर की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, माता को सिंदूर अर्पित किया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुहाग की लंबी उम्र के साथ सुख-समृद्धि की कामना की।

उल्लास और भावुकता का अनूठा संगम
पंडालों में सुबह से ही सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली।महिलाओं ने मां दुर्गा को पान के पत्तों से सिंदूर और मिठाई का भोग लगाया। इसके बाद मां के चरणों में सिंदूर अर्पित कर एक-दूसरे के गालों पर सिंदूर लगाकर होली की तरह इस उत्सव का आनंद लिया। जमशेदपुर के पंडालों में इस पारंपरिक रस्म को देखने और इसमें शामिल होने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे, जिससे पूरे शहर में फेस्टिव वाइब और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
नम आंखों से हुई मां की विदाई
एक तरफ जहां सिंदूर खेला में महिलाओं के चेहरे पर उल्लास और उमंग दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर मां के विदाई के क्षणों में सभी की आंखें नम थी। जमशेदपुर की विभिन्न पूजा कमेटियों की देखरेख में महिलाओं ने अगले साल फिर आने का आग्रह करते हुए मां दुर्गा को भारी मन से विदाई दी। पारंपरिक बंगाली गीतों, ढाक की थाप और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच शहर की प्रतिमाओं को सुवर्णरेखा नदी और खरकाई नदी के विभिन्न घाटों पर विसर्जन के लिए ले जाया गया। प्रशासन और स्थानीय पूजा कमेटियों द्वारा विसर्जन जुलूस और घाटों पर सुरक्षा, साफ-सफाई और शांति व्यवस्था के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पर्व के शांतिपूर्ण समापन के साथ ही लौहनगरी में अब अगले साल के दुर्गापूजा के आगमन का इंतजार शुरू हो गया है।

