पैरा एथलीट नीरज यादव का संदिग्घ परिस्थितियों में निधन: 3 गोल्ड मेडल जीतने वाले चैंपियन की मौत से खेल जगत स्तब्ध

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : भारतीय पैरा-एथलेटिक्स जगत से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। एशियन पैरा गेम्स में देश के लिए तीन स्वर्ण पदक जीतने वाले स्टार एथलीट नीरज यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। 42 वर्षीय पैरा-एथलीट का शव दिल्ली स्थित उनके फ्लैट में मिला। शुरुआती रिपोर्ट्स और मुख्य कोच के बयानों के आधार पर अंदेशा जताया जा रहा है कि उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या की है, हालांकि पुलिस और प्रशासन की आधिकारिक पुष्टि का अभी इंतजार है।

डोपिंग प्रतिबंध और एशियन पैरा गेम्स की टीस
​जानकारी के अनुसार, नीरज यादव पिछले कुछ समय से डोपिंग मामले में निलंबित चल रहे थे। इसी निलंबन के चलते वह हाल ही में जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे।

​संघर्ष से शिखर तक: पोलियो को हराकर बनाई थी पहचान
​उत्तर प्रदेश के रहने वाले नीरज यादव की जिंदगी हार न मानने वाले जज्बे की एक मिसाल थी। महज़ 7 साल की उम्र में उन्हें ‘पोस्ट-पोलियो रेजिडुअल पैरालिसिस’ (पोलियो के बाद होने वाला लकवा) ने अपनी गिरफ्त में ले लिया था। शरीर का निचला हिस्सा कमजोर होने के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।
​व्हीलचेयर टेनिस से शुरुआत: एथलेटिक्स में आने से पहले उन्होंने साल 2005 से 2012 तक व्हीलचेयर टेनिस खेला।
​एशियाई रिकॉर्ड: साल 2015 की दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स मीट में शॉट पुट, जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने तहलका मचा दिया। इसके बाद 2018 जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की F55 जैवलिन थ्रो स्पर्धा में 29.84 मीटर की दूरी तय कर एशियाई रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
​हांग्‍झू का स्वर्णिम सफर: साल 2023 में हांग्‍झू एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने जैवलिन और डिस्कस थ्रो में दो और स्वर्ण पदक जीतकर अपने कुल गोल्ड मेडल की संख्या तीन पहुंचाई थी।

खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा सवाल
​नीरज यादव का इस तरह जाना सिर्फ एक पदक विजेता की मौत नहीं, बल्कि खेल जगत के लिए एक गंभीर चेतावनी है। शारीरिक चुनौतियों (जैसे 7 साल की उम्र का लकवा) को मात देकर शिखर तक पहुंचने वाला एक चैंपियन अगर इस तरह टूट जाता है, तो यह खेल प्रशासकों और व्यवस्था के लिए सोचने पर मजबूर करता है कि क्या बैन या निलंबन के दौर से गुजर रहे एथलीटों को उचित मनोवैज्ञानिक समर्थन मिल रहा है? फिलहाल, दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और पुलिस इस पूरे मामले की हर एंगल से गहराई से जांच कर रही है।

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