डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : साल 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पार्टी के भीतर मचे घमासान के बीच महज दो दिनों के भीतर तीन बड़े विधायकों ने ‘आप’ का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस सियासी उठापटक से राज्य की भगवंत मान सरकार और पार्टी नेतृत्व के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है।
कुंवर विजय प्रताप सिंह का इस्तीफा और बीजेपी ज्वाइनिंग
अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोमवार 2 नवंबर को पंजाब विधानसभा की सदस्यता के साथ-साथ पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को भेजा था। कुंवर विजय प्रताप सिंह लंबे समय से भगवंत मान सरकार की कार्यप्रणाली, बेअदबी मामलों की जांच में देरी और नशा-अपराध जैसे मुद्दों को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर रहे थे। इसके बाद उन्होंने सोमवार को दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ले ली।
रविवाद को दो नेताओं ने दिया था बड़ा झटका
कुंवर विजय प्रताप सिंह से ठीक एक दिन पहले यानी रविवार 1 नवंबर को पटियाला जिले के दो प्रमुख विधायकों ने भी आम आदमी पार्टी को अलविदा कह दिया था। इसमें समाना सीट से विधायक और पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ामाजरा तथा सनौर सीट से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ये इस्तीफे ऐसे समय पर सामने आए जब ‘आप’ ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। पार्टी ने इस लिस्ट में 37 मौजूदा विधायकों को टिकट दिया था, लेकिन बगावत करने वाले इन नेताओं के नाम सूची से नदारद थे।
बीजेपी ने किया स्वागत, आप सरकार पर साधा निशाना
दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में पंजाब भाजपा प्रभारी सतीश पूनिया और प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने तीनों बागी विधायकों का पार्टी में स्वागत किया। बीजेपी में शामिल होने के बाद इन नेताओं ने राज्य की आप सरकार पर जमकर निशाना साधा और पार्टी पर तानाशाही व वादों से मुकरने का आरोप लगाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव नजदीक आते-आते यह भगदड़ आम आदमी पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकती है।

