डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : देश के सबसे बड़े और भरोसेमंद बैंक, भारतीय स्टेट बैंक ने चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक का यह प्रदर्शन इतना दमदार है कि इसने बाजार के तमाम अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। त्योहारी माहौल के बीच एसबीआई के इन आंकड़ों ने निवेशकों और ग्राहकों दोनों में जबरदस्त उत्साह भर दिया है।
क्यों रही एसबीआई की चांदी?
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक की इस रिकॉर्ड तोड़ सफलता के पीछे उसकी मजबूत रणनीति और लोन पोर्टफोलियो में व्यापक विस्तार है।
लोन बुक में जोरदार उछाल: तिमाही के दौरान बैंक की कुल लोन बुक 52 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई है। साल-दर-साल आधार पर ग्रॉस एडवांस 18% बढ़कर 52.08 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
हर सेक्टर में डबल-डिजिट ग्रोथ: एसबीआई की इस विकास यात्रा में कृषि, छोटे व्यवसाय, रिटेल और कॉर्पोरेट लोन—सभी क्षेत्रों में डबल-डिजिट की शानदार वृद्धि देखी गई है। कृषि क्षेत्र के लोन में 23%, जबकि एसएमई लोन में 22% की बढ़ोतरी हुई है।
एनपीए में भारी गिरावट – मजबूत हुई एसेट क्वालिटी: बैंक के लिए सबसे बड़ी राहत और मजबूती का संकेत उसका घटता हुआ बैड लोन है। एसबीआई का लोन-लॉस प्रोविजन 33% घटकर 2,759 करोड़ रुपये रह गया है। बैंक का ग्रॉस एनपीए घटकर महज 1.39% और नेट एनपीए गिरकर 0.36% पर आ गया है, जो बैंक की बेहतरीन वित्तीय सेहत को दर्शाता है।
डिपॉजिट और मार्जिन में भी सुधार
बैंक का कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 12% बढ़कर 62.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसके साथ ही, बैंक का घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन सुधरकर 3.11% पर पहुंच गया है, जो निवेशकों के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है।
कुल मिलाकर, एसबीआई के इन वित्तीय आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि देश की आर्थिकी की रीढ़ मजबूत है और बैंकिंग सेक्टर एक नए ग्रोथ साइकिल की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

