रांची: झारखंड की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुए घोटाले की जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस पूरे फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी अभय तिवारी से CID रिमांड पर लगातार पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में अभय तिवारी ने बताया कि उसने बिहार, हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों से एजेंटों के जरिए करीब 10 विशेषज्ञों को रांची बुलाया था। इन विशेषज्ञों से असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) की मेंस परीक्षा में अपने अभ्यर्थियों के उत्तर लिखवाए गए। इसके बदले उसने विशेषज्ञों को करीब 1 करोड़ रुपये देने की बात कबूल की है।
14 अभ्यर्थियों से वसूले 3 करोड़ से अधिक
जांच में सामने आया है कि अभय तिवारी ने ACF और FRO परीक्षा में कथित तौर पर मदद दिलाने के नाम पर 14 अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक वसूले थे। पूछताछ में उसने यह भी दावा किया कि जिन अभ्यर्थियों के उत्तर अपेक्षाकृत बेहतर थे, उनके अंक बढ़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों से संपर्क किया गया था। इसके लिए उन्हें मोटी रकम देने की बात भी सामने आई है।
एक साथ दो नौकरियां करने का खुलासा
जांच के दौरान अभय तिवारी के कथित ‘डबल जॉब’ का भी खुलासा हुआ है। आरोप है कि वह एक तरफ गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर ‘अभय तिवारी’ के नाम से नौकरी कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ TDPL कंपनी में ‘मनोज तिवारी’ के नाम से मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत था। यानी एक ही व्यक्ति कथित तौर पर दो अलग-अलग पहचान के साथ एक ही समय में दो नौकरियां कर रहा था और दोनों जगह से वेतन व अन्य लाभ हासिल कर रहा था।
13 साल में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने का दावा
अभय तिवारी पर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी करने के साथ-साथ खुद कई प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर सफलता हासिल करने का भी आरोप है। CID के अनुसार, उसने पिछले 13 वर्षों में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। इनमें इंडियन नेवी SSR, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में असिस्टेंट, नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड, CRPF हेड कांस्टेबल, JSSC पुलिस सब-इंस्पेक्टर, JSSC PGT और JPSC की ACF, FRO व FSO जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इनमें से कई परीक्षाओं में उसने पहली या दूसरी रैंक हासिल की थी। इन खुलासों के बाद सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और परीक्षा तंत्र की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

