संसद में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ 10 घंटे के बहस के बाद विपक्ष एक बार फिर सरकार को घेरने के लिए तैयारी कर रहा है। विपक्ष की तरफ से इस बार मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रहा है। कहा जा रहा है कि विपक्ष इसे लेकर गुरुवार यानी आज एक प्रस्ताव भी ला सकता है।
टीएमसी के नेतृत्व में एकजुट विपक्ष
इस बार तृणमूल कांग्रेस की तरफ से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। टीएमसीकी रणनीति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने की है।
टीएमसी को मिला कांग्रेस और सपा का साथ
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। टीएमसी की अगुवाई में तैयार यह नोटिस लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को दिया जाएगा।
आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी किए हस्ताक्षर
बैठक के बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे। इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं। नियम के महाभियोग की प्रक्रिया के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर की जरूरत पड़ती है। सीईसी को हटाने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के जजों को हटाने की तरह ही प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।
सीईसी के खिलाफ तीन मुद्दों को बनाया गया आधार
तीन मुद्दों को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आधार बनाया गया है। उसमें पहला है, मताधिकार मतलब मताधिकार से वंचित करना। इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति या समूह को वोट देने के अधिकार से रोकना या उनके नागरिक अधिकारों को छीनना है। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दूसरा आधार बनाया गया है कि चुनावी धोखाधड़ी या चुनाव में धांधली। विपक्ष का आरेप है कि इस चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जाती है। यह आरोप राहुल गांधी भी कई बार लगा चुके हैं जैसे एक ही पते पर कई वोटरों का होना। तीसरा आरोप मुख्य चुनाव आयुक्त पर है दुर्व्यवहार का। ममता बनर्जी का आरोप है कि उनकी पार्टी की तरफ से तीन बार मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर शिकायत की गई मगर उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के साथ दुर्व्यवहार किया। अंतिम बैठक में तो ममता बनर्जी भी मौजूद थीं और उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार बहुत खराब था,उनका लहजा ठीक नहीं था।

