NCERT की आठवीं की किताब में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’, CJI ने जताई सख्त नाराजगी

Reena Sharma
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सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका से जुड़ी सामग्री पर गंभीर आपत्ति जताई है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि वह किसी को भी न्यायपालिका की संस्था को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे। 

किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में करप्शन जुड़ा

NCERT ने क्लास 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की है। किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन जोड़ा गया है। बुक का अपडेटेड एडिशन पहले के एडिशन से अलग है। बुक में एक चैप्टर का नाम है हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका, जिसमें सिस्टम की कमजोरियों और लंबित मामलों के बारे में बताया गया है।

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अलग-अलग कोर्ट में पेंडिंग केसों की संख्या

किताब में इस समस्या के बड़े पैमाने को साफ-साफ बताया गया है। इसमें अलग-अलग कोर्ट में लगभग 53,321,000 पेंडिंग केस बताए गए हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में 81,000, पूरे भारत के हाई कोर्ट में 62.4 लाख (62,40,000) और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में लगभग 4.7 करोड़ (4,70,00,000) केस हैं।

लोगों की सोच और चिंताओं का भी जिक्र

चैप्टर में लोगों की सोच और चिंताओं का भी जिक्र है। चैप्टर में लिखा है, लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का अनुभव करते हैं। गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए न्याय तक पहुंच आसान नहीं है। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का जिक्र करते हुए, बुक में कहा गया है कि करप्शन और गलत काम लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

पुस्तक में जोड़े गए इस हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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