डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: स्वर्णरेखा नदी के किनारे बसे पानीपोड़ा गांव में मंगलवार को उस वक्त भारी हलचल मच गई, जब भारतीय सेना की एक स्पेशल बम निस्तारण टीम दलबल के साथ पहुंची। इलाके में मिले पुराने जिंदा बमों को नष्ट करने के लिए सेना ने पूरी फील्डिंग सजा ली थी, लेकिन अंतिम क्षणों में एक तकनीकी पेंच की वजह से इस धमाके को टालना पड़ा।
मिशन की पूरी थी तैयारी, खोदे गए थे सुरक्षा घेरे
मिली जानकारी के मुताबिक सेना के विशेषज्ञों ने इन पुराने जीवित बमों को ‘कंट्रोल्ड ब्लास्ट’ (नियंत्रित विस्फोट) के जरिए नष्ट करने का पूरा ब्लू-प्रिंट तैयार कर लिया था। सुरक्षा मानकों को शीर्ष पर रखते हुए टीम ने धमाके के असर को रोकने के लिए गहरे गड्ढे खोदे थे। नदी तट के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया था।
तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया था ताकि जान-माल का नुकसान न हो।
आखिरी मिनट में क्यों रुका धमाका?
जब सब कुछ तैयार था, तब ऊपर से आए एक आदेश ने मिशन को फिलहाल रोक दिया। बताया जा रहा है कि संबंधित विभाग और उच्चाधिकारियों से अंतिम आधिकारिक अनुमति मिलने में देरी हुई। कुछ तकनीकी कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक निर्देशों के अभाव में इस पूरी प्रक्रिया को अगली तारीख तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
प्रशासन की अपील: ‘न जाएं नदी के पास’
फिलहाल सेना या जिला प्रशासन ने अगली तारीख को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। चिह्नित स्थल पर 24 घंटे सुरक्षा और निगरानी रखी जा रही है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। स्थानीय लोगों से धैर्य बनाए रखने और बिना आधिकारिक सूचना के उस प्रतिबंधित क्षेत्र या नदी तट के पास न जाने की अपील की गई है। अगली कार्रवाई विभागीय आदेश मिलते ही शुरू की जाएगी। तब तक के लिए सुरक्षा बल मौके पर मुस्तैद हैं।

