बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए गठबंधन हो गया विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन, सीट शेयरिंग पर बात बनती नहीं दिख रही है। चुनाव से पहले दोनों गठबंधन के बीच खींचतान जारी है। इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने गठबंधन के सामने सीट शेयरिंग पर बड़ी शर्त रख दी है। चिराग पासवान ने कहा, उन्हें पता है कि उन्हें कितनी सीटों पर लड़ना है। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें ये भी पता है कि सीटों की संख्या से अधिक क्वालिटी मायने रखेगी।

वैसी सीटों चाहूंगा जिस पर शत प्रतिशत स्ट्राइक रेट दूं- चिराग
चिराग पासवान ने एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में कहा कि उनके जेहन में भी सीटों की संख्या है। सभी पार्टी के समर्थक और नेता ज्यादा सीट चाहते हैं। सीटों की संख्या से अधिक क्वालिटी मायने रखेगी। चिराग ने आगे कहा, मैं लोकसभा की तरह ही विधानसभा में वैसी सीटों को लेना चाहूंगा जिस पर शत प्रतिशत स्ट्राइक रेट दूं।
सीटों का बंटवारा के लिए बताया आधार
एलजेपी नेता ने आगे का कि लोकसभा में 100 परसेंट था। विधानसभा में भी 100 परसेंट रखना चाहता हूं। मेरे लिए दो सीटें कम-ज्यादा मायने नहीं रखतीं, लेकिन मेरे लिए वो सीटें मायने रखती हैं जो मैं शत प्रतिशत जीत कर गठबंधन को दे सकूं। मुझे लगता है इसी आधार पर सीटों का बंटवारा होना भी चाहिए।
बार-बार स्ट्राइक रेट की बात क्यों करते हैं ?
चिराग लगभग हर मंच से लोकसभा चुनाव के नतीजों का जिक्र करते हैं। वो अपने गठबंधन के साथ दलों को याद दिलाते हैं कि उनका स्ट्राइक रेट बिहार में सबसे बेहतर था। दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान को पांच सीटें मिली थीं। वे खुद तो जीते ही थे साथ ही अन्य सीटों पर उनके सारे प्रत्याशियों की जीत हुई थी। यही कारण है कि चिराग पासवान अक्सर 100 परसेंट स्ट्राइक रेट का जिक्र करते हैं।
एनडीए के ऐसा हो सकता है सीट शेयरिंग फॉर्मूला
बिहार में विधानसभा की 243 सीटें हैं। एनडीए में बिहार में पांच दल बीजेपी, जनता दल यूनाइटेड, एलजेपी रामविलास, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा है। सूत्रों की मानें तो ताजा आंकड़ा निकलकर आ रहा है उसके अनुसार, बिहार में 243 में से जदयू और बीजेपी के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है। जदयू 102 से 103 सीटों पर और बीजेपी 101 से 102 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। यह व्यवस्था 2020 के विधानसभा चुनाव के फॉर्मूले से मिलती-जुलती है, जब जदयू ने 115 और बीजेपी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था। बाकी बची लगभग 40 सीटें एनडीए के अन्य सहयोगी दलों- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) (एलजेपी-आर), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम), और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के बीच बांटी जाएंगी. चिराग पासवान की अगुवाई वाली एलजेपी-आर 25 से 28 सीटों की मांग कर रही है, जो कि उनकी पार्टी के मौजूदा राजनीतिक प्रभाव और लोकसभा में पांच सांसदों की मौजूदगी को देखते हुए एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है। वहीं, जीतन राम मांझी की हम को 6 से 7 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम को 4 से 5 सीटें मिलने की संभावना है।

