सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच चल रहा विवाद 26 साल बाद सुलझा लिया गया है। दोनों राज्य पानी के बंटवारे के फार्मूले पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद अब दोनों राज्यों के बीच जल्द ही मुख्य सचिव स्तर पर एमओयू (MoU) साइन किया जाएगा। बिहार सरकार ने इसकी औपचारिक जानकारी केंद्र सरकार को दे दी है।

कैसे होगा पानी का बंटवारा?
पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद झारखंड ने सकारात्मक रुख अपनाया है। तय समझौते के तहत सोन नदी के कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी का बंटवारा होगा। बंटवारे के मुताबिक, बिहार की हिस्सेदारी सोन नदी के पानी पर 5.00 MAF और झारखंड की 2.75 MAF सोन नदी के पानी पर हिस्सेदारी होगी।
इन्द्रपुरी जलाशय निर्माण योजना में जुटी बिहार सरकार
जल बंटवारे पर सहमति बनने के बाद बिहार सरकार इन्द्रपुरी जलाशय निर्माण की योजना में जुट गई है। इसके लिए डीपीआर तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस संबंध में प्रस्ताव राज्य मंत्रिपरिषद को भेज दिया गया है। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इस जलाशय के निर्माण से बिहार के आठ जिलों को सीधा लाभ मिलेगा और सिंचाई सुविधाएं बेहतर होंगी।
क्या है बिहार-झारखंड का सोन नदी विवाद ?
सोन नदी के जल को लेकर पहला बड़ा वाणसागर समझौता 1973 में हुआ था। उस समय विवाद मुख्य रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच था क्योंकि तब झारखंड बिहार का ही भाग था। लेकिन, वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन के बाद झारखंड ने बिहार से सोन नदी के पानी पर अपनी हिस्सेदारी की मांग शुरू कर दी। इससे विवाद शुरू हो गया। 1973 में हुए वाणसागर समझौता पर 53 साल पहले शुरू हुई प्रक्रिया के तहत अब झारखंड को भी अपने हिस्से का पानी मिलेगा।

