माओवादियों के ‘सुप्रीम कमांडर’ का अंत? जानिए कैसे 1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा तक पहुंचे सुरक्षाबल

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड में नक्सलवाद की रीढ़ तोड़ने की दिशा में सुरक्षाबलों को अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। कोल्हान और सारंडा के जंगलों में खौफ का पर्याय बन चुका 1 करोड़ का इनामी शीर्ष माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा अब कानून के शिकंजे में है। सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने गिरिडीह के जंगलों में एक बेहद गुप्त और सटीक घेराबंदी कर बेसरा के साथ उसके दो बेहद करीबी सहयोगियों—मेहनत उर्फ मोच्छू और गौरव को भी धर दबोचा।

सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर चला संयुक्त ऑपरेशन
​मंगलवार की देर रात जब कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के जांबाजों ने गिरिडीह के लक्षित इलाके को घेरा, तो माओवादी कैडर को भागने का संभलने तक का मौका नहीं मिला। सटीक इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर चलाए गए इस ऑपरेशन में तीनों नक्सलियों को बिना किसी बड़े नुकसान के आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी के लिए मजबूर कर दिया गया।

क्यों खास है यह गिरफ्तारी?
संगठन के शीर्ष नेतृत्व का खात्मा: मिसिर बेसरा माओवादी संगठन की केंद्रीय कमेटी और शीर्ष रणनीति बनाने वाले गिरोह का प्रमुख चेहरा था। उसकी गिरफ्तारी से भाकपा (माओवादी) का शीर्ष कमांड स्ट्रक्चर पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।

कोल्हान-सारंडा नेटवर्क ध्वस्त: पिछले लंबे समय से सारंडा के बीहड़ों में सुरक्षाबलों पर हमलों और लाल आतंक के विस्तार की कमान बेसरा ही संभाल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद संगठन के पास इस क्षेत्र में कोई बड़ा चेहरा नहीं बचा है।

पूछताछ में खुलेंगे बड़े राज
​फिलहाल तीनों गिरफ्तार नक्सलियों को सुरक्षित स्थान पर रखकर गहन पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि इस पूछताछ से माओवादियों के
​हथियारों और गोला-बारूद के गुप्त ठिकानों, लेवी (जबरन वसूली) और वित्तीय फंडिंग के नेटवर्क और जंगल में छिपे अन्य कैडरों के ठिकानों का सटीक सुराग मिलेगा। पुलिस और सुरक्षा बल जल्द ही इस पूरे ऑपरेशन का आधिकारिक खुलासा करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि झारखंड से माओवाद का पूरी तरह सफाया अब महज कुछ वक्त की बात है।

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