बिजली के तारों ने ली एक और गजराज के बच्चे की जान

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : सरायकेला-खरसावां जिले से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहां विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच का संघर्ष एक बार फिर एक मासूम जान पर भारी पड़ा है। कुकड़ू प्रखंड के तिरुलडीह (सापारुम गांव) में मंगलवार रात करंट की चपेट में आने से एक हाथी के बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब वन विभाग और हाथी भगाओ दस्ता हाथियों के झुंड को झारखंड-बंगाल की सीमा पर खदेड़ने में जुटा था। इसी अफरा-तफरी के बीच, मासूम हाथी बिजली के मौत के जाल में फंस गया।

घटना का विवरण: आखिर क्या हुआ?
​मंगलवार रात जब हाथी भगाओ दस्ता हाथियों को खदेड़कर वापस लौटा, तो अंधेरे का फायदा उठाकर मौत सापारुम गांव के खेतों में बिछी थी। बुधवार सुबह ग्रामीणों ने जब नन्हे हाथी का शव देखा, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटनास्थल के ठीक ऊपर से हाई-टेंशन बिजली के तार गुजर रहे हैं, जिससे प्राथमिक तौर पर यही माना जा रहा है कि बच्चा हाथी इन्हीं तारों की चपेट में आया होगा।

लगातार हो रहे हादसों ने खड़े किए सवाल
​सरायकेला-खरसावां जिले में हाथियों की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। आंकड़े गवाह हैं कि यह क्षेत्र हाथियों के लिए ‘डेथ जोन’ बनता जा रहा है:
​जुलाई 2019: चांडिल के खलारीसाई में 11,000 वोल्ट के तार ने एक वयस्क नर हाथी की जान ली।
​नवंबर 2023: मुसाबनी के पास एक साथ पांच हाथियों (दो मादा, एक नर और दो बच्चे) की 33,000 वोल्ट की लाइन से मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
​जून 2025: हेवन गांव में अवैध बिजली बाड़ के कारण एक मादा हाथी शिकार हुई।
​मई 2026: अब तिरुलडीह में एक बच्चे की मौत ने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है।

खतरे की दोहरी मार: लापरवाही या मजबूरी?
​क्षेत्र में हाथियों की मौत के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आ रहे हैं। पहला, अवैध बिजली बाड़, जो लोग अपनी फसलों को बचाने के लिए लगाते हैं। दूसरा, झूलते हुए हाई-टेंशन तार, जो वन क्षेत्रों में मानक ऊंचाई से काफी नीचे हैं।
​वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सटीक कारणों की पुष्टि हो पाएगी, लेकिन मौके की स्थिति विभाग की विफलता की ओर इशारा कर रही है। फिलहाल ग्रामीणों में दहशत और दुख दोनों है। वन विभाग मामले की जांच कर रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर कब तक मासूम गजराज इन इंसानी गलतियों की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे?

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