डॉ. तापस चटर्जी की अंतरराष्ट्रीय टीम ने प्रोबायोटिक तकनीक से प्रदूषण घटाने का दिया नया मॉडल
धनबाद। झारखंड के धनबाद (हीरापुर) के वैज्ञानिक डॉ. तापस चटर्जी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर भारत का नाम रोशन किया है। पोलैंड की जेज़ियोरको झील पर उनके शोध को 23 अप्रैल 2026 को ईरान से प्रकाशित प्रतिष्ठित ‘पर्शियन जर्नल ऑफ एकारोलॉजी’ में जगह मिली है। इस शोध में वे सह-लेखक के रूप में शामिल हैं और उनके काम की वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है।
इस रिसर्च में पोलैंड, मोंटेनेग्रो, भारत, नॉर्वे, ईरान, पाकिस्तान और तुर्की के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम किया। टीम ने झील में बढ़ते प्रदूषण और यूट्रोफिकेशन की समस्या से निपटने के लिए प्रोबायोटिक बैक्टीरिया का उपयोग कर एक नई दिशा दिखाई।
करीब 34 महीनों तक चले इस अध्ययन में झील के तटीय और गहरे हिस्सों की बारीकी से जांच की गई। वैज्ञानिकों ने 38 प्रजातियों के 9,739 जल माइट्स के नमूने जुटाए, जिनकी मदद से प्रदूषण के स्तर का सटीक आकलन किया गया। जल माइट्स को इस शोध में एक महत्वपूर्ण जैव-संकेतक के रूप में इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट में सामने आया कि प्रोबायोटिक बायोरिमेडिएशन तकनीक झील के गहरे हिस्सों में ऑक्सीजन स्तर सुधारने और तलछट कम करने में कारगर रही। हालांकि, तटीय इलाकों में बाहरी प्रदूषण के कारण सुधार पूरी तरह स्थायी नहीं हो पाया।
डॉ. तापस चटर्जी जलीय सूक्ष्म जीवों के क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं। वे 30 से अधिक देशों के डेटा पर आधारित 200 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं और जल माइट्स के वर्गीकरण में उनका योगदान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम माना जाता है।

