डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने जमशेदपुर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमबीबीएस (UG) और पीजी (PG) की सीटें बढ़ाने को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कॉलेज के कायाकल्प और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये का फंड भी पास किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के पत्र के अनुसार यह फैसला केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों को अपग्रेड करने के उद्देश्य से लिया गया है।
एक नजर में MGM के नए आंकड़े
एमबीबीएस (UG) सीटें: पहले कॉलेज में 150 सीटें थीं, जो अब बढ़कर 250 हो गई हैं (यानी सीधे 100 सीटों का इजाफा)।
पीजी (PG) सीटें: पहले यहां पीजी की सिर्फ 47 सीटें थीं, जिन्हें बढ़ाकर अब 149 कर दिया गया है (102 नई सीटों को मंजूरी)।
यूजी फंडिंग: एमबीबीएस स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 150 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं, जिसमें केंद्र सरकार का अंशदान 90 करोड़ रुपये है।
पीजी फंडिंग: पीजी सीटों के विस्तार के लिए 223.5 करोड़ रुपये की योजना है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 134.10 करोड़ रुपये रहेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा कायाकल्प, खरीदे जाएंगे नए उपकरण
सीटें बढ़ने के साथ ही कॉलेज में नए निर्माण, फैकल्टी की नियुक्ति और आधुनिक मेडिकल उपकरणों की खरीदारी तेजी से की जाएगी। इसके लिए तय किए गए बजट में केंद्र और राज्य दोनों की हिस्सेदारी होगी। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को इस संबंध में जल्द से जल्द एमओयू पर हस्ताक्षर कर मंत्रालय को भेजने का निर्देश दिया है ताकि काम समय पर शुरू हो सके।
इन विभागों में दूर होगी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
पीजी की सीटें बढ़ने से भविष्य में झारखंड को बेहतरीन स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स मिल सकेंगे। इससे मुख्य रूप से इन विभागों को बड़ा फायदा होगा:
मेडिसिन और सर्जरी, एनेस्थीसिया, गायनेकोलॉजी (स्त्री रोग), रेडियोलॉजी, बाल रोग विभाग (पीडियाट्रिक्स)
अस्पताल के अधीक्षक ने किया औचक निरीक्षण
एक तरफ जहां कॉलेज के अपग्रेडेशन की खबर आई, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अधीक्षक ने इमरजेंसी और मेडिसिन सहित अन्य प्रमुख विभागों का जायजा लिया और उपस्थित डॉक्टरों को निर्देश देते हुए कहा कि इमरजेंसी और अस्पताल के दवा काउंटर पर किसी भी हाल में दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सभी डॉक्टर और कर्मचारी समय पर अस्पताल आएं, इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

