Vat Savitri Puja: अखंड सौभाग्य का महापर्व, जमशेदपुर में सोलह श्रृंगार कर सुहागिनों ने की वट वृक्ष की पूजा

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में आज वट सावित्री व्रत का त्योहार पारंपरिक श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। नवविवाहिताओं से लेकर बुजुर्ग महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखा है।

सुबह से ही बरगद के पेड़ों के नीचे उमड़ी भीड़
​सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर के कई इलाकों साकची, बिष्टुपुर, कदमा, सोनारी, गोलमुरी और सिदगोड़ा के प्रमुख मंदिरों व पार्को में स्थित वट वृक्षों के नीचे सुहागिन महिलाओं का तांता लगना शुरू हो गया। रंग-बिरंगी साड़ियों खासकर पीली, लाल और हरी पारंपरिक साड़ियों में सजी-धजी महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की।

रक्षा सूत्र बांधकर की सुख-समृद्धि की कामना
​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। पूजा के दौरान महिलाओं ने ​वट वृक्ष की जड़ में जल, कच्चा दूध, रोली और अक्षत अर्पित किया। बांस के बने पंखे से वृक्ष को हवा दी और खरबूजा, आम और अंकुरित चना का भोग लगाया। पेड़ के चारों ओर घूमकर कच्चे सूत (रक्षा सूत्र) को तने में लपेटा और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए रक्षा सूत्र बांधते हुए परिक्रमा की।

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कथा सुनकर लिया बड़ों का आशीर्वाद
​पूजा स्थलों पर महिलाओं के समूहों ने बैठकर सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा सुनी, जिसमें बताया गया कि कैसे सती सावित्री ने अपने तपोबल से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने भीगे चने और फल का प्रसाद बांटा और घर के बड़े-बुजुर्गो का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। पूजा स्थलों के आसपास सुरक्षा और सुविधा के भी पुख्ता इंतजाम देखे गए।

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