अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को उस समय बड़ा झटका लगा जब NATO के सदस्य देशों ने ईरान के खिलाफ होरमुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी में साथ देने से साफ इनकार कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए होरमुज स्ट्रेट में नौसैनिक नाकेबंदी शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन NATO के अधिकांश देशों ने इस कदम से दूरी बना ली। NATO के सदस्य देशों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है और बड़े युद्ध का खतरा पैदा कर सकता है।
ब्रिटेन और फ्रांस जैसे प्रमुख देशों ने साफ कहा कि वे इस सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होंगे और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देंगे। वहीं, कई देशों ने यह भी कहा कि वे किसी भी हालत में इस संघर्ष में सीधे शामिल नहीं होना चाहते।
जानकारी के अनुसार, NATO के करीब 32 सदस्य देशों में से अधिकांश ने इस ऑपरेशन का समर्थन नहीं किया, जिससे अमेरिका अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ता दिख रहा है।
इस बीच, होरमुज जलडमरूमध्य—जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है—में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार भी प्रभावित हो रहा है और कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

