झारखंड के औद्योगिक विकास के पुरोधा प्रभात सिन्हा का निधन: जमशेदपुर से रांची तक शोक की लहर

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के औद्योगिक और सामाजिक हलकों में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले दिग्गज कॉर्पोरेट लीडर प्रभात सिन्हा अब हमारे बीच नहीं रहे। दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। 78 वर्षीय सिन्हा पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। सोमवार को दिल्ली में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया।

उनके निधन की खबर मिलते ही जमशेदपुर और रांची, दोनों शहरों में शोक की लहर दौड़ गई है। 19 नवंबर, 1948 को जन्मे प्रभात सिन्हा ने न केवल उद्योगों को नई ऊंचाइयां दीं, बल्कि लोगों के दिलों में भी अपनी जगह बनाई।

टाटा स्टील से लेकर रिलायंस तक: एक शानदार सफर
प्रभात सिन्हा का नाम पूर्वी भारत के स्टील और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है।

उनके करियर की कुछ मुख्य उपलब्धियां

टाटा स्टील में नेतृत्व: उन्होंने टाटा स्टील में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं और कंपनी की प्रगति में अहम भूमिका निभाई।

टाटा मेटालिक्स के चेयरमैन: टाटा समूह में उनके योगदान का ही परिणाम था कि वे टाटा मेटालिक्स के चेयरमैन पद तक पहुंचे।

रिलायंस का विस्तार: पेशेवर जरूरतों के कारण जब वे रांची शिफ्ट हुए, तो वहां उन्होंने रिलायंस समूह को राज्य में स्थापित करने और उसके विस्तार में मार्गदर्शक की भूमिका निभाई।

एक ‘पीपुल्स पर्सन’ की छवि
प्रभात सिन्हा केवल बोर्डरूम तक सीमित नहीं थे। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी विनम्रता और मिलनसार स्वभाव था। चाहे फैक्ट्री के मजदूर हों या शहर के आम नागरिक, वे हर किसी से बेहद सादगी और गर्मजोशी के साथ मिलते थे। यही कारण है कि जमशेदपुर के नागरिक जीवन और रांची के सामाजिक दायरे में उनकी कमी को गहराई से महसूस किया जा रहा है।

गुरुग्राम में होगी प्रार्थना सभा
दिवंगत प्रभात सिन्हा की स्मृति में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया है, जहां उनके परिजन और शुभचिंतक उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

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